फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद को जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित FNG Expressway प्रोजेक्ट में एक बार फिर तेजी के संकेत मिले हैं। नोएडा में छिजारसी कट से बहोलपुर अंडरपास तक प्रस्तावित लगभग 650 मीटर लंबी एलिवेटेड रोड की फाइल दोबारा खोल दी गई है। अब इस परियोजना के लिए नए सिरे से शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म—दो तरह के सर्वे कराए जाएंगे। इसके लिए पांच विशेषज्ञ एजेंसियों के नाम प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें से एक का चयन कर विस्तृत सर्वे और नई डीपीआर (Detailed Project Report) तैयार कराई जाएगी।
700 करोड़ की पुरानी डीपीआर, अब बनेगी नई रिपोर्ट
पहले तैयार की गई डीपीआर के अनुसार इस एलिवेटेड निर्माण पर लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था। लेकिन बदलती परिस्थितियों और तकनीकी जरूरतों को देखते हुए अब दोबारा सर्वे कर नई डीपीआर तैयार की जाएगी।
यह कार्य नोएडा ट्रैफिक सेल (एनटीसी) के माध्यम से कराया जाएगा और संबंधित फाइल सीईओ के अनुमोदन के लिए भेजी जा रही है। प्रस्तावित एजेंसियों में Central Road Research Institute, Urban Mass Transit Company, Delhi Integrated Multi-Modal Transit System और Indian Institute of Technology Roorkee जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं शामिल हैं।
गांव के ऊपर से गुजरेगी एलिवेटेड, नीचे की आबादी को राहत
योजना के अनुसार यह एलिवेटेड रोड छिजारसी गांव के ऊपर से निकाली जाएगी, जिससे नीचे रहने वाली आबादी को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके आगे 14.610 किमी प्वाइंट पर 5.65 किमी लंबी एक और एलिवेटेड रोड प्रस्तावित है, जो हिंडन नदी के पुश्ते से होकर गुजरेगी। इसके बाद Noida Greater Noida Expressway पर एक अंडरपास बनाया जाएगा, जिससे यातायात सुचारु रूप से आगे बढ़ सके।
23 किमी लंबे कॉरिडोर का 70% काम पूरा
एफएनजी एक्सप्रेस-वे का करीब 17 किमी हिस्सा पहले ही 70 प्रतिशत तक तैयार हो चुका है। पूरा कॉरिडोर छिजारसी से शुरू होकर नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे को पार करता हुआ यमुना तक लगभग 23 किमी लंबा होगा। यह एक्सप्रेस-वे गाजियाबाद के एनएच-24 से जुड़ते हुए नोएडा के छिजारसी, बहलोलपुर, सोरखा, सेक्टर-112, 140, 168 समेत कई प्रमुख सेक्टरों से होकर फरीदाबाद के गांव लालपुर तक पहुंचेगा। यह एनसीआर का पहला ऐसा एक्सप्रेस-वे होगा जो तीन बड़े शहरों को सीधे जोड़ेगा।
नोएडा में प्रस्तावित इंफ्रास्ट्रक्चर का खाका
नोएडा क्षेत्र में एफएनजी के तहत एक एलिवेटेड रोड और दो अंडरपास का निर्माण प्रस्तावित है।
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3.68 किमी लंबा अंडरपास बहलोलपुर के पास बनकर तैयार हो चुका है, जिस पर 30.29 करोड़ रुपये खर्च हुए।
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14.6 किमी प्वाइंट पर 650 मीटर लंबी एलिवेटेड के लिए लगभग 633 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत है।
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17.595 किमी पर एक और अंडरपास प्रस्तावित है, जिसकी लागत 150 करोड़ रुपये होगी।
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सेक्टर-168 के पास यमुना पर एक पुल बनाया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत 200 करोड़ रुपये है। इसका 50 प्रतिशत खर्च हरियाणा सरकार वहन करेगी।
इन सभी संरचनाओं को जोड़ने के लिए एप्रोच रोड और 75 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण भी किया जा रहा है।
1000 से अधिक उद्योगों और 17 सेक्टरों को मिलेगा सीधा लाभ
सामरिक और औद्योगिक दृष्टि से एफएनजी एक्सप्रेस-वे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह नोएडा के औद्योगिक बेल्ट से होकर गुजरेगा, जिससे सेक्टर-63, 64, 65, 67, 68, 80, 81, 83, 84, 85, 86, 87, 89, 90, 138, 140 और फेज-2 जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को सीधा कनेक्शन मिलेगा। इस फेज में 1000 से अधिक औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जिन्हें लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी के लिहाज से बड़ा फायदा होगा।
दिल्ली जाए बिना मिलेगा नया कनेक्शन
एफएनजी एक्सप्रेस-वे के पूर्ण होने के बाद गाजियाबाद से फरीदाबाद जाने के लिए दिल्ली से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे न केवल यात्रा समय कम होगा, बल्कि कालिंदी कुंज और नोएडा मास्टर प्लान रोड पर ट्रैफिक दबाव भी घटेगा। इसके अलावा नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और ग्रेटर फरीदाबाद के लिए यह कॉरिडोर लाइफलाइन साबित हो सकता है। गुरुग्राम तक पहुंचने के लिए भी एक वैकल्पिक और सुगम मार्ग उपलब्ध होगा।
एफएनजी एक्सप्रेस-वे की फाइल दोबारा खुलने से यह स्पष्ट है कि प्राधिकरण इस परियोजना को गति देने के लिए गंभीर है। अब निगाहें सर्वे रिपोर्ट और नई डीपीआर पर टिकी हैं, जिनके आधार पर इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर का भविष्य तय होगा।

