सेक्टर-150 स्थित एक निर्माणाधीन इमारत में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। बढ़ते जनआक्रोश और मामले की गंभीरता को देखते हुए योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (SIT) को नोएडा प्राधिकरण ने करीब 20 अधिकारियों की सूची सौंप दी है। SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजेगी।
SIT को दी गई तैनाती की पूरी जानकारी
SIT के निर्देश पर नोएडा प्राधिकरण ने हादसे वाले प्लॉट और आसपास के क्षेत्र में पिछले 2-3 वर्षों के दौरान तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों का विवरण खंगालकर सौंपा है। सूची में जूनियर इंजीनियर, असिस्टेंट प्रोजेक्ट इंजीनियर (APE) और अन्य तकनीकी स्टाफ शामिल हैं। टीम ने स्पष्ट तौर पर पूछा था कि संबंधित इलाके में किस-किस की तैनाती रही, ताकि लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जा सके। प्राधिकरण ने विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर यह जानकारी उपलब्ध कराई है।
पूर्व और वर्तमान-दोनों की भूमिका जांच के दायरे में
SIT ने साफ किया है कि जांच केवल वर्तमान तैनाती तक सीमित नहीं रहेगी। पूर्व में तैनात अधिकारियों की भूमिका भी जांची जाएगी। जांच के प्रमुख बिंदुओं में सुरक्षा इंतजामों की स्थिति, जलभराव/ड्रेनेज की व्यवस्था, निर्माण स्थल की निगरानी और मानकों के अनुपालन में हुई संभावित चूक शामिल हैं।
सूची से तय होगी जवाबदेही
प्राधिकरण द्वारा दी गई यह सूची SIT के लिए अहम आधार मानी जा रही है। इन्हीं नामों के आधार पर यह तय होगा कि किस स्तर पर चूक हुई। अंतिम रिपोर्ट में निलंबन, विभागीय कार्रवाई या अन्य दंडात्मक कदमों की सिफारिश संभव है।
सीएम को सौंपी जाएगी अंतिम रिपोर्ट
SIT इन 20 अधिकारियों के नामों और निष्कर्षों के साथ अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपेगी। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से तैयार अलग रिपोर्ट में भी कुछ नाम शामिल हो सकते हैं। सीएम स्तर से पहले ही सख्ती के संकेत मिल चुके हैं, इसलिए रिपोर्ट के बाद त्वरित कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
जनआक्रोश और पीड़ित परिवार की उम्मीद
युवराज मेहता की मौत के बाद से नोएडा कमिश्नरेट पुलिस, जिला प्रशासन और प्राधिकरण की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि इस बार जांच कागजी औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्सर ऐसे मामलों में जांच लंबी खिंच जाती है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री की सीधी निगरानी के चलते ठोस नतीजे सामने आने की उम्मीद है।

