नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत के मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। इस घटना ने नोएडा के विकास और सुरक्षा व्यवस्था के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
सरकार द्वारा गठित SIT का नेतृत्व ADG जोन मेरठ करेगी
सरकार द्वारा गठित SIT का नेतृत्व ADG मेरठ करेगी। वहीं टीम में ADG मेरठ, मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग (PWD) को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह SIT पूरे मामले की 5 दिनों के भीतर जांच कर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगी। जांच में प्रशासनिक लापरवाही, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और बिल्डरों की भूमिका को प्रमुखता से परखा जाएगा।
कैसे हुआ दर्दनाक हादसा?
नोएडा का सेक्टर-150, जिसे दिल्ली-एनसीआर के सबसे पॉश और ग्रीन सेक्टरों में गिना जाता है, वही एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के लिए मौत का जाल बन गया। जानकारी के अनुसार, ठंड की रात में जलभराव के कारण सड़क और गहरे गड्ढे का अंतर मिट चुका था। एक बिना घेराबंदी वाले खाली प्लॉट में कई फीट गहरे पानी में कार अनियंत्रित होकर जा गिरी। कार डूबने से इंजीनियर की दम घुटने से मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मृतक करीब दो घंटे तक मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन समय पर प्रभावी रेस्क्यू नहीं हो सका।
सीएम योगी के निर्देश से अफसरों में हड़कंप
जैसे ही मामला मीडिया में सुर्खियों में आया, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा प्राधिकरण से विस्तृत रिपोर्ट तलब की। लखनऊ से सख्त निर्देश मिलते ही नोएडा अथॉरिटी में अफसरों के बीच हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी और नियमों को ताक पर रखने वाले बिल्डरों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
जेई निलंबित, अधिकारियों को नोटिस
नोएडा प्राधिकरण के CEO लोकेश एम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही वर्क सर्कल के वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे पूछा गया है कि खुले गड्ढों और बिना बाउंड्री वाले प्लॉट्स पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
बिल्डरों पर FIR, सेफ्टी ऑडिट के आदेश
मृतक के परिजनों की तहरीर पर संबंधित बिल्डरों के खिलाफ लापरवाही से मौत (धारा 304A) सहित अन्य गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई है। नोएडा अथॉरिटी ने पूरे सेक्टर-150 और अन्य निर्माणाधीन इलाकों का तत्काल सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के सवाल
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया है, लेकिन परिजनों ने रेस्क्यू टीम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मृतक के पिता का आरोप है कि रेस्क्यू टीम केवल रस्सी लेकर पहुंची थी और उनके पास कोई वैकल्पिक या आधुनिक बचाव उपकरण नहीं था, जिससे समय रहते जान बचाई जा सकती।
विकास बनाम सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इस घटना के बाद विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि नोएडा में विकास केवल कागजों तक सीमित है। करोड़ों के फ्लैट बिक रहे हैं, लेकिन सड़कें अधूरी, ड्रेनेज सिस्टम फेल और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम बात हो गई है। मानसून और सर्दियों में ऐसे खुले गड्ढे जानलेवा जाल बन जाते हैं।
SIT की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
अब पूरे प्रदेश की निगाहें SIT की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या इस हादसे को केवल एक दुर्घटना मानकर छोड़ दिया जाएगा या फिर प्रशासनिक लापरवाही तय कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। यह मामला न सिर्फ नोएडा, बल्कि पूरे प्रदेश में शहरी विकास और नागरिक सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है।

