उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर कु. मायावती राजकीय महिला पीजी कॉलेज, बादलपुर (गौतमबुद्ध नगर) की पुरा छात्राओं द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को ऑनलाइन संबोधित किया। उन्होंने इस वर्ष की थीम “Together for a Period Friendly World” को महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य, सम्मान और समान अवसरों से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण बताया।
राज्यपाल ने सम्मेलन के आयोजन के लिए पुरा छात्राओं की सराहना करते हुए कहा कि यह सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है, जहां अब छात्राएं स्वयं नेतृत्व कर समाज को दिशा देने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म कोई बीमारी या कमजोरी नहीं, बल्कि नारीत्व की स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है। इसके बावजूद समाज में आज भी इस विषय को लेकर कई भ्रांतियां, मिथक और संकोच मौजूद हैं, जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जब कोई किशोरी पहली बार मासिक धर्म से गुजरती है तो उसे जानकारी देने के बजाय अक्सर डर और झिझक का माहौल दिया जाता है। यह सोच बदलनी होगी। परिवारों, विद्यालयों और समाज को इस विषय पर खुलकर संवाद करना चाहिए तथा बेटियों को सही जानकारी और सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।
राज्यपाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज भी कई महिलाएं सैनिटरी नैपकिन खरीदने में संकोच महसूस करती हैं और यह सामाजिक मानसिकता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि स्वच्छता की कमी से संक्रमण, एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं, जबकि लाखों महिलाएं अभी भी बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं से वंचित हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय सर्वेक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 48 प्रतिशत किशोरियों को पहले मासिक धर्म से पहले इसकी कोई जानकारी नहीं होती, जबकि स्वच्छ शौचालय, पानी और मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों की कमी के कारण लाखों लड़कियां पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं।
राज्यपाल ने मासिक धर्म स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज की मानसिकता में बदलाव और जागरूकता ही इस दिशा में सबसे बड़ा कदम है।

