लखनऊ। कभी बिजली संकट, अघोषित कटौती और कमजोर आपूर्ति व्यवस्था के लिए चर्चित रहने वाला उत्तर प्रदेश आज ऊर्जा क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते वर्षों में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था में व्यापक सुधार किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश रिकॉर्ड स्तर पर बिजली आपूर्ति कर रहा है।
वर्ष 2014 से 2017 के बीच प्रदेश में बिजली व्यवस्था गंभीर चुनौतियों से जूझ रही थी। उस समय बिजली दरों में वृद्धि के बावजूद उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही थी। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक लंबे समय तक बिजली कटौती आम बात थी। लेकिन वर्ष 2017 में डबल इंजन सरकार बनने के बाद ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सुधारों की शुरुआत हुई।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014-15 में प्रदेश में अधिकतम 13,003 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी। यह आंकड़ा वर्ष 2015-16 में 14,503 मेगावाट और वर्ष 2016-17 में 16,110 मेगावाट तक पहुंचा। इसके विपरीत वर्ष 2024-25 में प्रदेश ने 30,618 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग पूरी की, जबकि वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 31,486 मेगावाट तक पहुंच गया। मई 2026 में उत्तर प्रदेश ने 31,824 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग पूरी कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।
भीषण गर्मी और लगातार बढ़ती मांग के बावजूद प्रदेश में बिजली आपूर्ति सुचारु बनी हुई है। वर्तमान में जिला मुख्यालयों, महानगरों और तहसील क्षेत्रों में लगभग 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 22 से 22.30 घंटे तक निर्बाध बिजली आपूर्ति की जा रही है।
योगी सरकार द्वारा निर्धारित रोस्टर के अनुसार जिला मुख्यालयों पर 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर 21.30 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का प्रावधान है। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए निर्धारित रोस्टर से अधिक बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
यदि वर्ष 2017 से पहले की स्थिति पर नजर डालें तो उस समय जनपद मुख्यालयों पर औसतन 17 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर लगभग 12 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 11 घंटे बिजली आपूर्ति हो पाती थी। आज की स्थिति उस दौर की तुलना में काफी बेहतर मानी जा रही है।
बिजली उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 31 मार्च 2014 को प्रदेश की उत्पादन क्षमता 4,839 मेगावाट थी। यह क्षमता वर्ष 2019 में बढ़कर 5,474 मेगावाट, वर्ष 2022 में 6,134 मेगावाट, वर्ष 2024 में 7,140 मेगावाट और वर्ष 2025 में 7,800 मेगावाट तक पहुंच गई। 31 मार्च 2026 तक प्रदेश की कुल उत्पादन क्षमता 9,120 मेगावाट दर्ज की गई, जो वर्ष 2014 की तुलना में लगभग दोगुनी है।
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य किया गया है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में बढ़ती मांग के बावजूद निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने और ऊर्जा क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे। ऊर्जा क्षेत्र में हुए इन सुधारों का लाभ किसानों, व्यापारियों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं को समान रूप से मिल रहा है।

