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Kanpur Ramlila 2026: कैलाश खेर की भक्ति प्रस्तुतियों से गूंजा परेड मैदान, रामलीला के 150वें वर्ष में उमड़ा जनसैलाब, जानें क्या कुछ रहा खास

Kanpur Ramlila 2026: कैलाश खेर की भक्ति प्रस्तुतियों से गूंजा परेड मैदान

Kanpur Ramlila 2026: कैलाश खेर की भक्ति प्रस्तुतियों से गूंजा परेड मैदान

Kanpur Ramlila 2026: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले परेड मैदान में शरद पूर्णिमा की चांदनी रात संगीत और भक्ति के नाम रही। इस दौरान श्रीरामलीला सोसाइटी परेड के 150वें वर्ष समारोह में पद्मश्री गायक कैलाश खेर ने अपने कैलासा बैंड के साथ शानदार प्रस्तुति भी दी। उनके सुरों पर हजारों श्रोता झूम उठे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कार्यक्रम में भक्ति गीतों के साथ सूफियाना संगीत का भी अनूठा संगम देखने को मिला। वहीं, कार्यक्रम की शुरुआत कैलाश खेर ने अपने लोकप्रिय गीत ‘जाना जोगी दे नाल’ से की। उन्होंने ‘आदि योगी’, ‘आओ जी आओ जी’ और ‘राम ही पार लगाएंगे’ जैसे गीत प्रस्तुत किए। दरअसल, इन गीतों पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। जैसे ही रामधुन की शुरुआत हुई, पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। दर्शकों ने भी गायक के साथ सुर मिलाए और कार्यक्रम का आनंद लिया।

कैलाश खेर ने की कानपुर की तारीफ

कार्यक्रम के दौरान कैलाश खेर ने कानपुर की संस्कृति और आयोजन की व्यवस्था की जमकर तारीफ की। जिसमें उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा की रात इतना दिव्य आयोजन होना सुखद अनुभव है। साथ ही, उन्होंने बताया कि वह अपने गीतों के माध्यम से लोगों को परमात्मा और आत्मा से जुड़ी आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाना चाहते हैं।

कैलाश खेर ने श्रोताओं से केवल बैठकर सुनने के बजाय उनके साथ गाने और झूमने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि कैलासा लाइव कार्यक्रम का मतलब है कि हर कोई इसमें भागीदारी करे।

‘महाराज, गजब व्यवस्था की है, मजा आ गइस’

बता दें कानपुर की व्यवस्था और दर्शकों के अनुशासन से प्रभावित कैलाश खेर ने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल की तारीफ करते हुए कहा, ‘महाराज, गजब व्यवस्था की है, मजा आ गइस।’ उन्होंने शहर की संस्कृति और आधुनिकता के साथ परंपराओं को सहेजने की भावना की भी सराहना की। गायक ने बताया कि उन्होंने बिठूर से चंदन मंगवाकर अपने माथे पर लगाया है।

भक्ति गीतों ने बांधा समां

कार्यक्रम में ‘रंग देनी रंग देनी’, ‘तौबा तौबा’ और ‘तेरे बिन नहीं लगदा दिल मेरा ढोलना’ जैसे लोकप्रिय गीतों ने दर्शकों को खूब झुमाया। वहीं, ‘राम का रतजगा’ जैसी प्रस्तुतियों ने रामभक्ति का माहौल बना दिया। श्रीरामलीला के 150वें वर्ष के इस आयोजन में संगीत, संस्कृति और श्रद्धा का यादगार संगम देखने को मिला।

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