उत्तर प्रदेश के जन भवन परिसर में ‘गंगासागर नमो नमः’ परियोजना का लोकार्पण राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
गंगोत्री से गंगासागर तक आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव
राज्यपाल की प्रेरणा और परिकल्पना से विकसित इस परियोजना के माध्यम से जन भवन परिसर में गंगोत्री से गंगासागर तक की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक यात्रा को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है। परियोजना में कैलाश धाम की अवधारणा के अनुरूप भगवान शिव की प्रतिमा, मानसरोवर का प्रतीक और चार धाम—गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ तथा बद्रीनाथ की मार्बल प्रतिकृतियां स्थापित की गई हैं।इसके आगे प्रयागराज के संगम, काशी के घाट और अंत में गंगासागर को दर्शाया गया है। इससे आगंतुक एक ही परिसर में गंगा की उद्गम यात्रा से लेकर सागर में उसके विलय तक की सांस्कृतिक परंपरा का अनुभव कर सकेंगे।
6.41 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई परियोजना
‘गंगासागर नमो नमः’ परियोजना को लगभग 6 करोड़ 41 लाख रुपये की लागत से विकसित किया गया है। इसके निर्माण में लोक निर्माण विभाग के सिविल और विद्युत विभाग तथा उद्यान विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। परियोजना के ‘गंगोत्री से गंगासागर’ हिस्से पर लोक निर्माण विभाग (सिविल) द्वारा 4 करोड़ 19 लाख रुपये, विद्युत कार्य पर 31 लाख रुपये और उद्यान विकास पर 78 लाख रुपये खर्च किए गए। वहीं, ‘गंगासागर फाउंटेन’ को 1 करोड़ 13 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया है।
110 मीटर लंबी परियोजना में प्राकृतिक और आधुनिक तकनीक का मेल
परियोजना की कुल लंबाई करीब 110 मीटर है, जबकि कैलाश से गंगासागर तक इसकी अधिकतम ऊंचाई लगभग 6 मीटर है। करीब एक वर्ष में पूरी हुई इस परियोजना में लगभग 1,000 टन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। इसका डिजाइन और क्रियान्वयन अहमदाबाद की ‘लैंडस्केप इंडिया’ संस्था ने किया है। परियोजना की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इस संस्था की स्थापना और संचालन महिलाओं द्वारा किया जाता है। संस्था की ओर से सुश्री अभिजा दलाल और सुश्री पारिता सखिया ने इसका प्रतिनिधित्व किया।
शिव डमरू म्यूजिकल फाउंटेन बना प्रमुख आकर्षण
परियोजना में जल, प्रकाश, संगीत, कला और आधुनिक तकनीक का समन्वय देखने को मिलता है। ‘शिव डमरू म्यूजिकल फाउंटेन’ इसी समन्वय का प्रमुख उदाहरण है। इसमें जलधाराओं के साथ एलईडी लाइटिंग, ध्वनि और प्रोग्रामेबल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। फाउंटेन में ‘शिव तांडव’, ‘मनुष्य तू बड़ा महान है’ और ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की’ जैसी रचनाओं को शामिल किया गया है। इससे यह स्थान धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभव के साथ संगीत और दृश्य कला का भी केंद्र बनता है।
पर्यावरण संरक्षण को भी दी गई प्राथमिकता
परियोजना के विकास में हरित क्षेत्र और पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा गया है। परिसर में 17 प्रजातियों के 40 वृक्ष लगाए गए हैं। इसके अलावा करीब 100 प्रकार की झाड़ियों के लगभग 6,000 पौधे भी लगाए गए हैं। हरियाली से परियोजना की प्राकृतिक सुंदरता बढ़ने के साथ जैव-विविधता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी मिलता है।
जल पुनर्चक्रण की आधुनिक व्यवस्था
परियोजना में जल संरक्षण के लिए लगभग एक लाख लीटर क्षमता वाला भूमिगत जल टैंक बनाया गया है। इसके माध्यम से फाउंटेन और जलधारा तंत्र में पानी के पुनर्चक्रण की व्यवस्था की गई है। इस पहल से परियोजना के सौंदर्यात्मक स्वरूप के साथ जल संरक्षण को भी जोड़ा गया है।
देश के विभिन्न हिस्सों की शिल्प परंपरा का समावेश
‘गंगासागर नमो नमः’ परियोजना में देश के अलग-अलग क्षेत्रों की पारंपरिक शिल्पकला और कारीगरी को स्थान दिया गया है। अंबाजी के सोमपुरा कारीगरों ने मंदिर स्थापत्य से जुड़ी नक्काशी और निर्माण कार्य में योगदान दिया। परियोजना को मूर्त रूप देने में डिजाइनरों, शिल्पकारों, अभियंताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और निर्माण से जुड़े अन्य कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निर्धारित समय से पहले पूरा हुआ निर्माण
विस्तृत स्वरूप वाली यह परियोजना निर्धारित समय-सीमा से लगभग एक महीने पहले पूरी कर ली गई। समय से पूर्व निर्माण पूरा होने को परियोजना की योजना, विभागीय समन्वय, निगरानी और टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया गया।
गंगा आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम ने बांधा समां
लोकार्पण के बाद राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्यों ने परियोजना का भ्रमण किया। शिव डमरू फाउंटेन के समीप बने गंगासागर में गंगाजल अर्पित करने के बाद विधिवत गंगा आरती आयोजित की गई। गंगा आरती के बाद आदर्श माध्यमिक विद्यालय, जन भवन के विद्यार्थियों और राजकीय बाल गृह (बालिका), सिंधी खेड़ा की बालिकाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने ‘गंगा धराय शिव गंगा धराय’, ‘कर लो-कर लो चारों धाम’ और ‘गंगा तेरा पानी अमृत’ जैसे गीतों का सामूहिक गायन किया।
बालिकाओं ने बांधा रक्षासूत्र
परियोजना के लोकार्पण से पहले राजकीय बाल गृह (बालिका), सिंधी खेड़ा की 14 बालिकाओं ने मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ तथा दोनों उपमुख्यमंत्रियों श्री केशव प्रसाद मौर्य और श्री ब्रजेश पाठक सहित उपस्थित अधिकारियों को राखी बांधी। बालिकाओं ने रक्षासूत्र बांधकर भाई-बहन के स्नेह और आपसी संबंध का संदेश दिया। इस आत्मीय पहल ने कार्यक्रम में सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव का एक विशेष आयाम जोड़ा।
संस्कृति, पर्यावरण और जन-जागरूकता का केंद्र बनता जन भवन
परियोजना के संबंध में विशेष कार्याधिकारी, श्री राज्यपाल (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने कहा कि ‘गंगासागर नमो नमः’ जन भवन परिसर को एक विशिष्ट सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक पहचान प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि जन भवन की भूमिका अब केवल प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। यहां संस्कृति, कला, पर्यावरण और जन-जागरूकता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को भी स्थान मिल रहा है। ‘गंगासागर नमो नमः’ इसी व्यापक दृष्टिकोण का एक प्रमुख उदाहरण है।
गंगा संरक्षण का संदेश
परियोजना के माध्यम से गंगा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता के साथ उसके संरक्षण का संदेश भी दिया गया है। इसका उद्देश्य आगंतुकों को भारतीय परंपरा, गंगा के महत्व, जल संरक्षण और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने के लिए प्रेरित करना है। ‘गंगासागर नमो नमः’ इस प्रकार जन भवन परिसर में संस्कृति, आध्यात्मिकता, प्राकृतिक सौंदर्य और आधुनिक तकनीक के समन्वय से तैयार एक ऐसा अनुभवात्मक स्थल बनकर सामने आया है, जहां गंगा की यात्रा और उससे जुड़ी भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को एक ही स्थान पर देखा और समझा जा सकता है।

