Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में लगातार तीन दिनों से हुई बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दरसअल, पश्चिम बंगाल की ओर से आए अर्नव तूफान के असर से हुई भारी बारिश के वजह से ग्रामीण इलाकों में धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। जिसमें सबसे ज्यादा असर पिपराइच विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। बता दें यहां कई एकड़ खेतों में पानी भर जाने से पककर तैयार धान की फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है।
पिपराइच के कई गांवों में खेत बने तालाब
जानकारी के लिए बता दें बारिश के वजह से पिपराइच क्षेत्र के जंगल अयोध्या प्रसाद नंबर दो, जंगल नाकिन, चौहान टोला, केवटालिया, मलमलिया, दरोगा टोला, छोटी नाकिन और बड़ी नाकिन गांवों में जलभराव की स्थिति बन गई है। जिसके वजह से खेतों में घुटनों तक पानी भरा हुआ है। धान की तैयार फसल पानी में डूबने के साथ जमीन पर बिछ गई है।
ऐसे में किसान अपनी फसल बचाने के लिए घुटनों तक पानी में उतरकर उसे समेटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लगातार पानी भरे रहने के कारण फसल के सड़ने और खराब होने का खतरा बढ़ गया है। जिस वजह से किसानों को डर है कि अगर जल्द पानी नहीं निकला तो उनकी पूरी मेहनत बर्बाद हो जाएगी।
किसानों की जमा पूंजी पर फिरा पानी
इस बारिश ने छोटे और सीमांत किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिसमें किसानों का कहना है कि धान की खेती में उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी लगा दी थी। महीनों की मेहनत के बाद फसल तैयार हुई थी, लेकिन कटाई से ठीक पहले हुई बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। ऐसे में अब किसानों के सामने परिवार का खर्च चलाने और अगली फसल की तैयारी करने का संकट खड़ा हो गया है। जिसमें कई किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है।
मुआवजे के लिए किसानों ने प्रशासन से लगाई गुहार
मिली जानकारी के मुताबिक, पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से प्रभावित गांवों में जल्द सर्वे कराने की मांग की है। जिसमें किसानों का कहना है कि खेतों में हुए जलभराव और फसल के नुकसान का सही आकलन किया जाए, ताकि उन्हें उचित मुआवजा मिल सके। इस मामले में गोरखपुर के उपजिलाधिकारी कुणाल रस्तोगी का पक्ष भी सामने आया है।
प्रशासन से राहत मिलने की उम्मीद में किसान
ऐसे में लगातार बारिश से धान की फसल बर्बाद होने के बाद अब पिपराइच के किसान प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। किसानों का सवाल है कि उनकी बर्बाद हुई फसल का सर्वे कब होगा और मुआवजा कब मिलेगा। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन कितनी जल्दी प्रभावित गांवों में नुकसान का आकलन कराकर किसानों को राहत पहुंचाता है।
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