कानपुर नगर निगम में राजनीतिक मतभेदों और शहर की बुनियादी समस्याओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं। एक ओर महापौर और पांच पार्षदों के बीच कथित खींचतान सुर्खियों में है, तो दूसरी ओर शहरवासी गंदगी, जाम और जलभराव जैसी समस्याओं से राहत की उम्मीद कर रहे हैं। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली में बदलाव को लेकर भी चर्चा हो रही है।
नगर निगम की सियासत के बीच विकास पर सवाल
कानपुर में महापौर और पार्षदों के बीच मतभेदों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। वहीं, नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी नगर निगम के सामने बनी हुई है। शहर के लोगों को उम्मीद है कि राजनीतिक खींचतान से अलग हटकर सफाई, जल निकासी और यातायात जैसी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा।
टेंडर घोटाले और सांसद-महापौर के बीच मतभेद चर्चा में
कानपुर में टेंडर घोटाले से जुड़े मामले ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। इसके साथ ही सांसद और महापौर के बीच कथित शीत युद्ध भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इन घटनाक्रमों के बीच शहर के विकास कार्यों और प्रशासनिक जवाबदेही पर लोगों की नजर है।
जिलाधिकारी के बाद नगर आयुक्त भी सक्रिय
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के कानपुर का कार्यभार संभालने के बाद नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय की सक्रियता भी चर्चा में है। शहर से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नगर आयुक्त अपना पक्ष रख रहे हैं। नागरिकों की समस्याओं का समाधान और विकास कार्यों को गति देना नगर प्रशासन के सामने अहम चुनौती है।
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय से खास बातचीत
शहर की मौजूदा स्थिति, नगर निगम की कार्यप्रणाली और विकास से जुड़े मुद्दों पर संवाददाता आलोक शर्मा ने नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय से विशेष बातचीत की। इस एक्सक्लूसिव बातचीत में कानपुर से जुड़े अहम सवालों और प्रशासनिक दृष्टिकोण को जानने का मौका मिलेगा। देखिए ‘यूपी की बात’ का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू और जानिए कानपुर के नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने शहर के प्रमुख मुद्दों पर क्या कहा।

