मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आयोजित राज्यस्तरीय शिक्षामित्र सम्मान समारोह में पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बिना नियम-कानून के शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बनाने का प्रयास पूरी तरह गलत था, जिसके चलते Supreme Court of India को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस समय डेढ़ लाख परिवारों के सामने संकट खड़ा हो गया था, लेकिन उनकी सरकार ने संवाद और सहयोग के जरिए समाधान निकालते हुए सेवाएं समाप्त करने के बजाय शिक्षामित्रों को साथ लेकर काम किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 में मानदेय 3,500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 किया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।
सभी शिक्षामित्रों को मिलेगी स्वास्थ्य सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुरक्षा देने की भी घोषणा की और बेसिक शिक्षा परिषद को निर्देश दिया कि सभी जरूरतमंदों को इसका लाभ तत्काल मिले। साथ ही सभी शिक्षामित्रों के बैंक खाते खुलवाकर मानदेय सीधे खातों में भेजने और नजदीकी विद्यालयों में तैनाती सुनिश्चित करने की बात कही, विशेषकर महिला शिक्षामित्रों के लिए स्थानांतरण में सुविधा देने पर जोर दिया।
शिक्षा क्रांति का जिक्र
उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए बताया कि ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं 30-36% से बढ़कर 96-99% तक पहुंच गई हैं और ड्रॉपआउट दर 19% से घटकर 3% रह गई है। सरकार द्वारा बच्चों को यूनिफॉर्म, बैग, किताबें और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
शिक्षामित्रों से अपील, हर बच्चा पहुंचे स्कूल
मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों से ‘स्कूल चलो अभियान’ को सफल बनाने का आह्वान करते हुए हर बच्चे को स्कूल लाने, सकारात्मक सोच अपनाने और बच्चों को प्रेरित करने की अपील की। कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षामित्रों को सम्मानित किया और ‘अरुणोदय’ कैलेंडर का विमोचन भी किया, जो विद्यार्थियों के समग्र विकास को बढ़ावा देगा।

