उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत तथा आधुनिक बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सेवाओं का असर सीधे आम आदमी तक दिखना चाहिए और सुविधाओं की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे आधुनिक तकनीक और बेहतर गुणवत्ता से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना को गरीबों का सबसे बड़ा सहारा बताते हुए निर्देश दिया कि मरीजों के क्लेम भुगतान समय पर किए जाएं, ताकि जरूरतमंदों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बैठक में मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कहा कि दीनदयाल राज्य कर्मचारी कैशलेस योजना में अब आयुष पद्धतियों के तहत इलाज को भी शामिल किया जाएगा। इससे कर्मचारियों को चिकित्सा विकल्पों का दायरा और व्यापक मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी ने कोविड काल में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को लेकर भी अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी एनएचएम के अंतर्गत कार्य करने वाले ऐसे स्वास्थ्य कर्मियों का प्राथमिकता के आधार पर उचित समायोजन किया जाए।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी गंभीरता दिखाई। उन्होंने एम्बुलेंस रिस्पॉन्स टाइम को और कम करने के निर्देश देते हुए कहा कि आपात स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और समय पर पहुंची मदद किसी की जान बचा सकती है।
सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में तीन महीने से कम एक्सपायरी वाली दवाएं नहीं रखी जानी चाहिए। साथ ही मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सुरक्षित प्रसव व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 44 से बढ़कर 83 हो गई है। साथ ही नर्सिंग शिक्षा, स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई।
मुख्यमंत्री ने रिसर्च, मेडटेक, डिजिटल हेल्थ, कैंसर उपचार, ट्रॉमा सेंटर, आईसीयू और इमरजेंसी सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने के निर्देश दिए।

