लखनऊ: उत्तर प्रदेश में होने वाले द्विवार्षिक राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और आंवला से पांच बार के विधायक धर्मपाल सिंह का नाम भी शामिल है। लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन में सक्रिय भूमिका के बाद अब बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा के लिए मैदान में उतारा है।
बरेली से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
धर्मपाल सिंह का जन्म 15 जनवरी 1953 को बरेली जिले में हुआ। उन्होंने एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से एलएलबी और बीएड की शिक्षा हासिल की। राजनीति में आने से पहले उनका जुड़ाव शिक्षण और स्थानीय स्तर की सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों से रहा। इसके बाद उन्होंने बीजेपी के जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर अपनी राजनीतिक पहचान बनाई और धीरे-धीरे प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया।
1996 में पहली बार बने विधायक
धर्मपाल सिंह पहली बार 1996 में आंवला विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। विधानसभा पहुंचने के कुछ समय बाद ही उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी मिली। 1997 में मायावती सरकार में उन्हें राज्य मंत्री बनाया गया। इसके बाद उन्होंने कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाली सरकारों में भी मंत्री पद संभाला। इस दौरान उन्हें पंचायती राज और श्रम जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली।
2002 में दूसरी बार विधानसभा पहुंचे
2002 में धर्मपाल सिंह दूसरी बार विधानसभा के सदस्य चुने गए। इस कार्यकाल में उन्होंने विभिन्न विधानसभा समितियों में भी जिम्मेदारियां निभाईं। इसी दौरान उन्हें श्रम विभाग में राज्य मंत्री के तौर पर स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी मिली। विधानसभा की सरकारी आश्वासन समिति, सार्वजनिक उपक्रम समिति और लोक लेखा समिति जैसी समितियों से भी उनका जुड़ाव रहा।
2012 में तीसरी बार मिली जीत
2012 के विधानसभा चुनाव में धर्मपाल सिंह ने तीसरी बार जीत दर्ज की। वर्ष 2012 से 2017 के बीच वह बीजेपी विधानमंडल दल में उपनेता की भूमिका में रहे। इस अवधि में उनकी भूमिका केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रही, बल्कि पार्टी के संगठनात्मक और राजनीतिक कामकाज में भी उनकी सक्रियता बनी रही।
2017 में चौथी जीत के बाद योगी सरकार में मंत्री
2017 के विधानसभा चुनाव में धर्मपाल सिंह ने आंवला सीट से लगातार चौथी जीत दर्ज की। उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में उन्हें शामिल किया गया। शुरुआती कार्यकाल में उन्हें सिंचाई एवं सिंचाई यांत्रिकी जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई। सरकार में रहते हुए उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों और सिंचाई से जुड़े विषयों पर काम किया।
2022 में पांचवीं बार विधायक बने
धर्मपाल सिंह ने 2022 के विधानसभा चुनाव में भी अपनी सीट बरकरार रखी और पांचवीं बार विधायक चुने गए। इसके बाद योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्हें फिर मंत्री बनाया गया। उन्होंने पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाली। उनके पास सरकार में अलग-अलग समय पर अन्य विभागों का दायित्व भी रहा है।
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र पर फोकस
वर्तमान में धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री हैं। इस जिम्मेदारी के तहत पशुपालन, डेयरी और इससे जुड़े ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मुद्दे उनके कार्यक्षेत्र में आते हैं। उनकी राजनीति में ग्रामीण विकास, किसान हित और कृषि से जुड़े क्षेत्रों को प्रमुखता मिलती रही है।
अब राज्यसभा की राह पर धर्मपाल सिंह
पांच बार विधानसभा चुनाव जीत चुके धर्मपाल सिंह को अब बीजेपी ने राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। उनका लंबा राजनीतिक अनुभव और सरकार तथा संगठन में निभाई गई अलग-अलग जिम्मेदारियां उनके राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। बीजेपी के इस फैसले के बाद अब धर्मपाल सिंह के राज्यसभा जाने की संभावनाओं पर नजर है। उनके चयन को उत्तर प्रदेश में पार्टी के अनुभवी नेताओं को उच्च सदन में प्रतिनिधित्व देने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

