लखीमपुर खीरी के तिकुनिया हिंसा कांड से जुड़े गवाहों को कथित रूप से धमकाने के मामले में नया अपडेट सामने आया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा और उनके बेटे आशीष मिश्रा की इस मामले में कोई संलिप्तता नहीं पाई गई है। सरकार ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि दोनों के खिलाफ इस प्रकरण में कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को आगे बढ़ाया
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राज्य सरकार की स्थिति रिपोर्ट पर विचार किया। इसके बाद आशीष मिश्रा की जमानत याचिका पर सुनवाई फिलहाल टाल दी गई है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले महीने तय की है।
एक आरोपी के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि गवाहों को धमकाने से जुड़े मामले में अमनदीप सिंह नामक व्यक्ति के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। संबंधित अदालत ने भी इस चार्जशीट का संज्ञान ले लिया है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि मामले की सुनवाई अगले तीन महीनों के भीतर पूरी होने की संभावना है।
3 अक्टूबर 2021 को हुई थी तिकुनिया हिंसा
लखीमपुर खीरी के तिकुनिया क्षेत्र में 3 अक्टूबर 2021 को किसानों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। आरोप है कि एक एसयूवी की चपेट में आने से चार किसानों की मौत हुई थी। इसके बाद हुई हिंसा में वाहन चालक और भाजपा के दो कार्यकर्ताओं की भी मौत हुई थी। इस घटना में एक पत्रकार समेत कुल आठ लोगों की जान गई थी।
गवाहों को धमकाने का अलग मामला भी दर्ज हुआ था
मुख्य हिंसा मामले के अलावा गवाहों को कथित रूप से डराने-धमकाने के आरोपों को लेकर अलग से मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में अजय मिश्रा और आशीष मिश्रा के नाम सामने आए थे। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में कहा कि जांच के दौरान दोनों के खिलाफ इस मामले में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला।

