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​सूरजपुर न्यायालय में नोएडा प्राधिकरण की बड़ी कानूनी जीत,स्टे की आड़ में भूमाफियाओं द्वारा की जा रही अवैध निर्माण की कोशिश नाकाम,

सूरजपुर, गौतमबुद्ध नगर। सूरजपुर स्थित गौतमबुद्ध नगर न्यायालय में नोएडा प्राधिकरण को भूमि विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है। सिविल जज (जूनियर डिविजन), गौतमबुद्ध नगर की अदालत ने सिविल वाद संख्या 758/2025 में पूर्व में जारी अस्थायी निषेधाज्ञा (Stay Order) को निरस्त कर दिया है। यह आदेश 7 सितंबर 2026 को पारित किया गया। मामले में बीपीईएस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से वाद दायर किया गया था, जबकि नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा प्राधिकरण) सहित अन्य पक्षकार प्रतिवादी हैं। प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता संदीप सिंह चौहान ने न्यायालय में पक्ष रखा।

14 हेक्टेयर से अधिक भूमि से जुड़ा है विवाद

यह मामला करीब 14.1010 हेक्टेयर भूमि से संबंधित है, जो लगभग 34.829 एकड़ के बराबर है। इतनी बड़ी भूमि के स्वामित्व और उपयोग से जुड़े विवाद के कारण मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।प्राधिकरण की ओर से अदालत के समक्ष भूमि से संबंधित दस्तावेजों और कानूनी तथ्यों को प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान अस्थायी निषेधाज्ञा को जारी रखने के औचित्य पर भी पक्ष रखा गया।

स्टे की आड़ में निर्माण के प्रयास का आरोप

प्राधिकरण की ओर से अदालत में यह मुद्दा उठाया गया कि पूर्व में जारी स्थगन आदेश का सहारा लेकर संबंधित भूमि पर कथित तौर पर ऐसी गतिविधियां की जा रही थीं, जिनसे मौके की स्थिति में बदलाव हो सकता था। प्राधिकरण के अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष रखा। उनका कहना था कि स्थगन आदेश का उपयोग भूमि पर निर्माण अथवा अन्य गतिविधियों के लिए सुरक्षा कवच के तौर पर किए जाने की कोशिश की जा रही थी।

अदालत ने अस्थायी निषेधाज्ञा की समीक्षा के बाद लिया फैसला

मामले में प्रस्तुत तथ्यों और कानूनी दलीलों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने पूर्व में जारी अस्थायी निषेधाज्ञा को निरस्त कर दिया। इस फैसले के बाद संबंधित भूमि पर प्राधिकरण की स्थिति को लेकर उसे महत्वपूर्ण राहत मिली है। अदालती आदेश से फिलहाल उस अंतरिम संरक्षण का अंत हो गया है, जिसके आधार पर संबंधित पक्ष को पूर्व में राहत प्राप्त थी। मामले से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार आगे होगा।

प्राधिकरण की संपत्ति की सुरक्षा पर जोर

नोएडा प्राधिकरण के मुख्य विधि सलाहकार वीके सिंह ने कहा कि प्राधिकरण की भूमि, संपत्ति और सार्वजनिक हितों से जुड़े मामलों में कानून के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई और न्यायालय में मजबूत पैरवी जारी रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की संपत्तियों की सुरक्षा और उनके संरक्षण के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे। वही नोएडा अथॉरिटी के सीईओ कृष्णा करुणेश ने चेतावनी देते हुए कहा कि अथॉरिटी की जमीनों पर कब्ज़ा करने वाले भू माफियाओ की खैर नहीं ,

अधिवक्ता ने की प्राधिकरण की ओर से पैरवी

इस मामले में नोएडा प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता संदीप सिंह चौहान ने न्यायालय में पैरवी की। उन्होंने सुनवाई के दौरान प्राधिकरण के पक्ष में कानूनी तर्क और उपलब्ध दस्तावेज प्रस्तुत किए।अदालत द्वारा 7 सितंबर को अस्थायी निषेधाज्ञा निरस्त किए जाने को प्राधिकरण की ओर से महत्वपूर्ण कानूनी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है और इससे जुड़े अंतिम अधिकार एवं अन्य कानूनी प्रश्न न्यायिक प्रक्रिया के तहत तय होंगे।

 

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