अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) एक बार फिर आंदोलन और प्रशासनिक खींचतान का केंद्र बन गया है। इस बार विवाद की मुख्य वजह छात्र संघ चुनाव की बहाली है, जिसे लेकर छात्र पिछले कई दिनों से लामबंद हैं। कैंपस के डक पॉइंट पर जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 11वें दिन भी जारी रही। आंदोलन को और आक्रामक रूप देते हुए छात्रों ने विश्वविद्यालय की प्रसिद्ध मौलाना आजाद लाइब्रेरी के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र संघ चुनाव कराने की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं करता, तब तक लाइब्रेरी का ताला नहीं खोला जाएगा और न ही यह आंदोलन समाप्त होगा।
2019 से ठप पड़े हैं छात्र संघ चुनाव
एएमयू में साल 2019 के बाद से छात्र संघ चुनाव नहीं कराए गए हैं। लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग को लेकर छात्र लगातार आंदोलनरत हैं। इस सिलसिले में 19 सितंबर से छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र यासर फहद का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन केवल खोखले आश्वासन दे रहा है और चुनाव कराने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
धरने पर रात के अंधेरे में हमले का आरोप
विवाद उस समय और बढ़ गया जब चुनाव की मांग उठा रहे एक छात्र को एएमयू प्रशासन द्वारा निलंबित कर दिया गया। इसके विरोध में भूख हड़ताल शुरू हुई, जिसे अब 9 दिन से अधिक का समय हो चुका है। भूख हड़ताल पर बैठे यासर फहद ने आरोप लगाया कि आंदोलन को कुचलने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
धरने को जबरन खत्म कराने के उद्देश्य से कुछ बाहरी और असलाधारी लोगों को मौके पर भेजा गया, जिन्होंने शांत तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को जान से मारने की धमकियां दीं। देर रात धरना स्थल पर हुई धक्का-मुक्की और मारपीट में एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
दोनों पक्षों में मारपीट
दूसरी ओर, इस विवाद में पहुंचे छात्र फैसल त्यागी ने भी अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि वे अपने साथियों के साथ आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में डक पॉइंट पहुंचे थे, जहां उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और मारपीट की गई। फैसल ने पूरे घटनाक्रम की सीसीटीवी फुटेज से निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि यदि जांच में उनकी कोई गलती साबित होती है तो वे किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करने को तैयार हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन को भी सूचित कर दिया गया है। एएमयू प्रॉक्टर ने इस पूरे मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि दोनों पक्षों से प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं, जिन्हें जांच के लिए जिला प्रशासन को भेजा जा रहा है। डक पॉइंट पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि संदिग्धों और असलाधारी तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। फिलहाल, कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है और छात्र अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।

