यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने किसानों से जुड़े 7 प्रतिशत आबादी भूखंडों के लंबे समय से लंबित विवादों के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने लक्ष्य तय किया है कि अगले छह महीनों के भीतर इन विवादों को चरणबद्ध तरीके से सुलझा लिया जाएगा, ताकि औद्योगिक और आवासीय विकास को बिना बाधा गति दी जा सके।
किसानों के मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता: सीईओ
यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने जानकारी दी कि 7 प्रतिशत आबादी भूखंड देने का मामला प्राधिकरण की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों को अब तक आबादी भूखंड नहीं मिल सके हैं, उन्हें पहले चरण में योजना के दायरे में लाया जाएगा। इसके लिए किसानों से अलग-अलग स्तर पर संवाद और आपसी सहमति के आधार पर समाधान निकाला जाएगा।
29 गांवों के लिए चाहिए 500 हेक्टेयर जमीन
सीईओ ने बताया कि प्राधिकरण क्षेत्र के 29 गांवों के किसानों को आबादी भूखंड देने के लिए लगभग 500 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। इस उद्देश्य से गांव-वार कार्ययोजना तैयार की जा रही है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और विवादमुक्त तरीके से पूरी की जा सके।
सहमति से होगी जमीन की खरीद, वहीं विकसित होंगे भूखंड
योजना के तहत किसानों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन खरीदी जाएगी और उसी भूमि पर आबादी भूखंड विकसित किए जाएंगे। वर्तमान में सेक्टर-18 और आसपास के क्षेत्रों में किसानों को आबादी भूखंड देकर विकास को गति देने की रणनीति बनाई गई है।
973 आवासीय भूखंडों की नई योजना जल्द
प्राधिकरण जल्द ही 973 आवासीय भूखंडों की एक नई योजना लॉन्च करेगा। इसमें 17.5 प्रतिशत आरक्षण उन किसानों के लिए रखा जाएगा, जिन्होंने यमुना सिटी के विकास के लिए अपनी जमीन दी है। इससे किसानों को सीधा लाभ मिलने के साथ-साथ नियोजित शहरीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
कोर्ट के फैसलों से प्राधिकरण को बड़ी राहत
यमुना प्राधिकरण को हाल के समय में न्यायिक स्तर पर भी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के अर्जेंसी क्लॉज से जुड़े एक ऐतिहासिक फैसले में प्राधिकरण को फायदा हुआ है। इसके अलावा हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील में भी यीडा के पक्ष में निर्णय आया, जिसके बाद करीब डेढ़ दर्जन मामलों को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इससे लगभग 1800 भूखंडों पर कब्जा मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
छह महीनों में दिखेगा जमीन पर असर
सीईओ राकेश कुमार सिंह ने भरोसा जताया कि 7 प्रतिशत आबादी भूखंडों को लेकर प्राधिकरण का यह प्रयास छह महीनों के भीतर धरातल पर दिखने लगेगा। किसानों से निरंतर संवाद कर सहमति के साथ जमीन खरीदने और भूखंड आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सभी काश्तकारों की सहमति होगी अनिवार्य
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी एक स्थान पर स्थित भूमि के सभी काश्तकारों की सहमति आवश्यक होगी। इसके लिए सेक्टर और पॉकेट स्तर पर अलग-अलग रणनीति अपनाई जाएगी, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रहें और विकास कार्य बिना किसी कानूनी या प्रशासनिक बाधा के आगे बढ़ सकें। यह पहल यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे विवादों के समाधान के साथ-साथ किसानों और विकास, दोनों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

