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SIR मैपिंग में नाम छूटा तो क्या करें? नोटिस से न घबराएं, एक दस्तावेज देने से बचेगा वोट

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मैपिंग से नाम छूटने पर हजारों मतदाता असमंजस में हैं। मताधिकार साबित करने के लिए दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। जन्म प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र और परिवार रजिस्टर की नकल के लिए कलेक्ट्रेट, तहसील और ब्लॉक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे आमजन मानसिक दबाव में है।

निवास प्रमाणपत्र बना सबसे बड़ी बाधा

मतदाताओं के सामने सबसे बड़ी समस्या निवास प्रमाणपत्र को लेकर आ रही है। निर्वाचन आयोग ने मैपिंग के लिए स्थायी निवास प्रमाणपत्र को एक विकल्प के रूप में स्वीकार किया है, लेकिन कई जिलों में यह प्रमाणपत्र जारी ही नहीं होता। इसके स्थान पर सामान्य निवास प्रमाणपत्र बनाया जाता है, जिसे कई मामलों में सत्यापन के दौरान मान्य नहीं किया जा रहा। ऐसे में अधिकारी अब जाति प्रमाणपत्र बनवाने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन उसकी प्रक्रिया और अधिक जटिल है। इसी तरह परिवार रजिस्टर की नकल और जन्म प्रमाणपत्र के लिए भी लोगों को पिछले 10-15 दिनों से ब्लॉक कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

नोटिस से न घबराएं, 13 में से एक दस्तावेज काफी

उप जिला निर्वाचन अधिकारी यमुनाधर चौहान ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने पर मतदाता को घबराने की जरूरत नहीं है। आयोग के निर्देशों के अनुसार, मतदाता को केवल 13 निर्धारित अभिलेखों में से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य है। एक भी वैध दस्तावेज देने पर मतदाता का नाम सूची में सुरक्षित रह सकता है।

मैपिंग के लिए मान्य दस्तावेजों की सूची

निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 13 मान्य दस्तावेज इस प्रकार हैं-

समय पर दस्तावेज देकर सुरक्षित रखें मताधिकार

प्रशासन का कहना है कि यदि मतदाता समय-सीमा के भीतर निर्धारित दस्तावेज प्रस्तुत कर देता है, तो उसका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रहेगा। इसलिए नोटिस मिलने पर घबराने के बजाय उपलब्ध दस्तावेजों की जांच करें और संबंधित कार्यालय में समय पर प्रस्तुत कर अपने मताधिकार को सुरक्षित रखें।

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