काशी में पर्यटन को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से नमो घाट से शुरू की जाने वाली हेलिकॉप्टर सेवा अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। करीब एक साल दो महीने पहले, 15 नवंबर 2024 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने नमो घाट पर बने हेलिपैड का उद्घाटन किया था, लेकिन इसके बाद भी यहां से अब तक एक भी हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका है।
स्काई टूरिज्म का सपना अधूरा, योजना कागजों में सिमटी
सरकार की योजना थी कि वाराणसी को स्काई टूरिज्म के एक नए केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। नमो घाट से तीन और छह सीटर हेलिकॉप्टर के माध्यम से पर्यटकों को काशी का हवाई दर्शन कराया जाना था। इस हवाई यात्रा में श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट, गंगा नदी का विहंगम दृश्य, नमो घाट से अन्य घाटों तक की गंगा आरती, गोदौलिया-चौक क्षेत्र, कालभैरव मंदिर और रामनगर किले का हवाई अवलोकन शामिल था। इसके साथ ही नमो घाट से अयोध्या के लिए हेलिकॉप्टर सेवा शुरू करने की भी योजना बनाई गई थी, जिससे धार्मिक पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिल सकता था।
दो हेलिपैड तैयार, फिर भी उड़ान नहीं
नमो घाट के फेज-3 क्षेत्र में दो हेलिपैड तैयार किए गए हैं, इसके बावजूद हेलिकॉप्टर सेवा शुरू नहीं हो सकी। हेलिकॉप्टर संचालन के लिए नमो घाट का संचालन करने वाली कार्यदायी संस्था द्वारा ई-टेंडर भी जारी किया गया, लेकिन अब तक कोई उपयुक्त वेंडर नहीं मिल सका है। इसी वजह से पूरी परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई है।
जिम्मेदारी को लेकर स्मार्ट सिटी और एजेंसी में मतभेद
हेलिकॉप्टर सेवा के संचालन को लेकर जिम्मेदारी स्पष्ट न होने से भी मामला उलझा हुआ है। पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि नमो घाट से जुड़े हेलिपैड का संचालन स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत आता है।
वहीं स्मार्ट सिटी के संपर्क अधिकारी शाकंभरी का दावा है कि नमो घाट पर कोई हेलिपैड नहीं है, बल्कि वह एक मल्टीपरपज ग्राउंड है। दूसरी ओर, नमो घाट का संचालन कर रही आरके वैदिक कंपनी के प्रबंधक पुनीत अग्रवाल का कहना है कि हेलिकॉप्टर सेवा से जुड़े सभी निर्णय स्मार्ट सिटी प्रबंधन स्तर पर ही लिए जाएंगे।
पर्यटन को मिल सकता था बड़ा लाभ
राजघाट और आदि केशव घाट के बीच 1.71 किलोमीटर लंबाई में विकसित नमो घाट को जल-थल-नभ पर्यटन का मॉडल बनाने की मंशा थी। योजना थी कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक काशी के घाटों, श्री काशी विश्वनाथ धाम और महाश्मशान का विहंगम दृश्य आसमान से देख सकें। इससे स्थानीय पर्यटन व्यवसाय, होटल उद्योग और रोजगार को भी बढ़ावा मिलता, लेकिन फिलहाल यह महत्वाकांक्षी योजना अधूरी ही रह गई है।
सवालों के घेरे में परियोजना की कार्यप्रणाली
एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी हेलिकॉप्टर सेवा शुरू न होना प्रशासनिक समन्वय और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। उद्घाटन के बाद भी सेवा का संचालन न होना काशी के पर्यटन विकास के दावों को कमजोर करता नजर आ रहा है। अब देखना यह है कि शासन और संबंधित एजेंसियां इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए कब तक ठोस कदम उठाती हैं।

