योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बाढ़ सुरक्षा और जल प्रबंधन के क्षेत्र में देशभर में एक मॉडल स्टेट के रूप में अपनी पहचान बनाई है। वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं की संख्या, बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र और लाभान्वित आबादी में लगातार उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रदेश के आठ प्रमुख रिवर बेसिन-गंगा, यमुना, गण्डक, सरयू, रामगंगा, राप्ती-रोहिन, सोन और गोमती-के डूब क्षेत्रों में अब तक 1,950 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इसके परिणामस्वरूप 523 तटबंधों के निर्माण से 3,869 किलोमीटर क्षेत्र को बाढ़ से सुरक्षा मिली है और लगभग 3.72 करोड़ लोग प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हुए हैं। साथ ही प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था को भी सुदृढ़ आधार प्राप्त हुआ है।
वर्ष 2017-18 से बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं में निरंतर बढ़ोतरी
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश के अनुसार वर्ष 2017-18 में जहां 74 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं संचालित की गई थीं, वहीं 2018-19 में इनकी संख्या बढ़कर 111 हो गई। इससे बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र 0.65 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.88 लाख हेक्टेयर पहुंचा और 22.03 लाख लोग लाभान्वित हुए।
वर्ष 2019-20 में 151 और 2020-21 में 196 परियोजनाओं के माध्यम से क्रमशः 2.88 और 5.01 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ से सुरक्षा प्रदान की गई। वर्ष 2021-22 में 167 परियोजनाओं के जरिए बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र बढ़कर 10.90 लाख हेक्टेयर हो गया, जिससे 46.26 लाख लोगों को प्रत्यक्ष राहत मिली।
2023-24 में बाढ़ सुरक्षा कार्यों ने छुआ सर्वोच्च स्तर
प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण कार्यों को निरंतर गति देते हुए वर्ष 2022-23 में 283 परियोजनाओं के माध्यम से 3.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सुरक्षा प्रदान की गई। वर्ष 2023-24 में बाढ़ सुरक्षा कार्यों ने अब तक का सर्वोच्च स्तर छूते हुए 362 परियोजनाओं के जरिए 10.79 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सुरक्षित किया, जिससे 68.97 लाख लोग लाभान्वित हुए। वर्ष 2024-25 में 321 परियोजनाओं से 4.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सुरक्षित हुआ, जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 285 परियोजनाओं के माध्यम से 4.33 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ से सुरक्षा दी जा चुकी है और 55.69 लाख आबादी को राहत मिली है।
रिकॉर्ड तटबंध निर्माण से प्रभावी बाढ़ नियंत्रण
प्रदेश में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित करने के उद्देश्य से वर्ष 2017 से अब तक 3,869 किलोमीटर लंबाई के 523 तटबंधों का निर्माण किया गया है। इनमें 19 अतिसंवेदनशील तटबंध (464.92 किमी) और 18 संवेदनशील तटबंध (241.58 किमी) शामिल हैं। बलिया, देवरिया, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, बहराइच, कुशीनगर सहित कई बाढ़ प्रभावित जिलों में कटान-रोधी और तटबंध सुरक्षा कार्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
ड्रेनेज और ड्रेजिंग कार्यों से जल निकासी मजबूत
इसके अतिरिक्त विभाग द्वारा प्रदेश में लगभग 60,047 किमी लंबाई की 10,727 ड्रेनेज परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनके विस्तार के लिए वर्ष 2025-26 में 74.32 करोड़ रुपये की लागत से गोंडा, बिजनौर, हापुड़, बहराइच और मिर्जापुर में नए ड्रेजिंग कार्यों को मंजूरी दी गई है।
जनकेंद्रित नीतियों का परिणाम
प्रदेश में बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र और लाभान्वित आबादी में हो रही लगातार वृद्धि, योगी सरकार की जनकेंद्रित और जवाबदेह कार्यसंस्कृति का परिणाम है। इन निरंतर प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को जल प्रबंधन और बाढ़ सुरक्षा के क्षेत्र में देश का मॉडल राज्य बनाकर स्थापित कर दिया है।

