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विरासत गलियारे का अधूरा काम बना चिंता का कारण, होली के विजय जुलूस पर संकट की आशंका

गोरखपुर में होलिका दहन और होली के अवसर पर निकलने वाला विजय जुलूस सदियों से चली आ रही एक परंपरा है, जिसका निर्वहन हर वर्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं करते हैं। होलिका दहन के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर वे इस पारंपरिक जुलूस की अगुवाई करते हैं। लेकिन इस वर्ष विरासत गलियारे (Heritage Corridor) का अधूरा निर्माण इस परंपरा पर असमंजस की स्थिति पैदा करता दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट पर अधूरा काम

गोरखपुर का प्रमुख विरासत गलियारा प्रोजेक्ट धर्मशाला बाजार से घंटाघर होते हुए रेती चौक तक विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का क्रियान्वयन उत्तर प्रदेश सरकार के लोक निर्माण विभाग द्वारा नगर निगम की योजना के साथ मिलकर किया जा रहा है। उद्देश्य पूरे क्षेत्र को एक समान विरासत शैली में विकसित करना है, लेकिन तय समय-सीमा के बावजूद कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। होली जैसे बड़े पर्व में कुछ ही दिन शेष हैं, ऐसे में निर्माण की धीमी गति पर सवाल उठने लगे हैं।

सुरक्षा इंतजामों को लेकर उठे सवाल

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि विरासत गलियारे के कई हिस्सों में निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं। घंटाघर क्षेत्र में नालियों का निर्माण तो किया जा रहा है, लेकिन उन पर स्लैब नहीं लगाए गए हैं। सड़कों का कार्य भी अधूरा है और कई जगह चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगे हैं। हाल ही में शहर के एक अन्य निर्माण स्थल पर हुई दुर्घटना में एक मासूम की जान जाने की घटना ने चिंताओं को और गहरा कर दिया है।

जुलूस मार्ग पर अधूरा निर्माण बना चुनौती

होली के दिन विजय जुलूस घंटाघर के पांडे हाता से निकलकर धर्मशाला बाजार तक जाता है। यही मार्ग विरासत गलियारे का हिस्सा भी है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि यदि निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं हुआ तो जुलूस की सुरक्षा और सुचारू संचालन कैसे सुनिश्चित किया जाएगा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि परंपरा के साथ किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लिया जाना चाहिए।

परंपरा बनाम तैयारी, निर्णय पर टिकी निगाहें

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या लोक निर्माण विभाग समय रहते निर्माण और सुरक्षा से जुड़े सभी कार्य पूरे कर पाएगा, या फिर किसी वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करना पड़ेगा। यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ी यह पारंपरिक होली यात्रा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व भी रखती है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि परंपरा का निर्वहन भी हो और किसी प्रकार की अनहोनी की आशंका भी न रहे।

समयबद्ध कार्रवाई की जरूरत

स्थानीय लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए या कम से कम जुलूस मार्ग पर सभी सुरक्षा मानकों को तत्काल सुनिश्चित किया जाए। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में प्रशासन और पीडब्ल्यूडी इस चुनौती से कैसे निपटते हैं और क्या सदियों पुरानी परंपरा इस वर्ष भी उसी गरिमा के साथ निभाई जा सकेगी।

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