वृंदावन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की सात दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक रविवार से आरंभ हो गई है। संघ प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में यह महत्वपूर्ण बैठक वृंदावन स्थित केशव धाम में आगामी शनिवार तक चलेगी।
देशभर के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल
इस उच्चस्तरीय बैठक में संघ के सह-सरकार्यवाह सहित देशभर से तीन दर्जन से अधिक वरिष्ठ पदाधिकारी और प्रचारक हिस्सा ले रहे हैं। बैठक के दौरान संघ के विभिन्न प्रकल्पों की वर्तमान स्थिति, उनके प्रभाव और भविष्य की दिशा पर विस्तार से समीक्षा की जाएगी।
सामाजिक समरसता और संगठन विस्तार पर फोकस
सात दिनों तक चलने वाली इस बैठक में सामाजिक समरसता से जुड़े चल रहे कार्यक्रमों की गति और प्रभाव का भी आंकलन किया जाएगा। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों-विशेषकर असम, बंगाल से लेकर दक्षिण में केरल-को ध्यान में रखते हुए संघ के ध्येय वाक्य “बंटोगे तो कटोगे” को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की रणनीति पर गहन मंथन होगा। इसके तहत सभी हिंदू परिवारों और बस्तियों में निरंतर संवाद चलाने, संगठन के विस्तार, तथा जमीनी स्तर पर सामाजिक समरसता को मजबूत करने जैसे एजेंडों पर चर्चा की जा रही है।
संगठनात्मक ढांचे में बदलाव पर विचार
बैठक में संघ की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रांत और क्षेत्र स्तर पर दायित्वों में संभावित बदलावों पर भी विमर्श किया जाएगा, ताकि संगठनात्मक समन्वय और प्रभावशीलता बढ़ाई जा सके।
राजनीतिक दृष्टि से भी अहम बैठक
राजनीतिक दृष्टि से भी यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) के प्रतिनिधि महासचिव बीएल संतोष की बैठक में आमद हो चुकी है। बीजेपी नेतृत्व द्वारा बिहार पृष्ठभूमि वाले युवा नेता नितिन नवीन सिन्हा को कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किए जाने और राष्ट्रीय परिषद की बैठक में इस निर्णय को अधिमान्यता देने से पहले संघ की यह बैठक राजनीतिक हलकों में खास महत्व रखती है।
मंत्रियों की उपस्थिति पर नजर
इसके साथ ही समीक्षकों की नजर इस बात पर भी टिकी हुई है कि मोदी सरकार के कौन-कौन से मंत्री इस दौरान वृंदावन पहुंचते हैं। ऐसे किसी भी आगमन को राजनीतिक संकेतों के रूप में देखा जाएगा। वृंदावन में चल रही आरएसएस की यह सात दिवसीय बैठक संगठनात्मक समीक्षा, सामाजिक समरसता, आगामी चुनावी वर्ष की रणनीति और राजनीतिक समन्वय- इन सभी दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

