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आजमगढ़ में सपा के वरिष्ठ विधायक आलम बदी का निधन, सादगी और ईमानदारी के लिए बनाई थी अलग पहचान

आजमगढ़ में सपा के वरिष्ठ विधायक आलम बदी का निधन, सादगी और ईमानदारी के लिए बनाई थी अलग पहचान

आजमगढ़ में सपा के वरिष्ठ विधायक आलम बदी का निधन, सादगी और ईमानदारी के लिए बनाई थी अलग पहचान

आजमगढ़। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक आलम बदी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होंने अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही आजमगढ़ समेत पूरे प्रदेश के राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। आलम बदी अपनी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के लिए लंबे समय से पहचाने जाते थे।

पांच बार विधायक रहे आलम बदी

आलम बदी उत्तर प्रदेश विधानसभा के सबसे वरिष्ठ विधायकों में शामिल रहे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र का पांच बार प्रतिनिधित्व किया। समाजवादी पार्टी के टिकट पर उन्होंने पहली बार वर्ष 1996 में विधायक का चुनाव जीता था। इसके बाद वह वर्ष 2002, 2012, 2017 और 2022 में भी निजामाबाद सीट से विधायक चुने गए। अपने लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने क्षेत्र की जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

1936 में हुआ था जन्म

आलम बदी आजमी का जन्म 16 मार्च 1936 को आजमगढ़ जिले के सगड़ी तहसील क्षेत्र के बिंदवल गांव में हुआ था। उनके पिता बदीउज्जमा गोरखपुर के मियां साहब जॉर्ज इस्लामिया इंटर कॉलेज में शिक्षक थे। आलम बदी की प्रारंभिक शिक्षा भी गोरखपुर में हुई। उनके परिवार में छह पुत्र हैं। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक सेवा और राजनीति को समर्पित किया।

1989 से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

आलम बदी ने वर्ष 1989 में आजमगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर राजनीति में सक्रिय भूमिका शुरू की। इसके बाद उन्होंने विधानसभा राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई और लगातार जनता के बीच सक्रिय रहे।

 

सादगी और ईमानदारी के लिए थे प्रसिद्ध

आलम बदी की पहचान एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में रही, जिन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम माना। विधायक रहते हुए भी उन्होंने कभी दिखावे की राजनीति नहीं की। उनकी सादगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता था कि वह कई बार स्कूटर से विधानसभा पहुंचते थे। आम लोगों के बीच रहना, उनकी समस्याएं सुनना और समाधान का प्रयास करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा था।

विरोधी भी करते थे व्यवहार की प्रशंसा

राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आलम बदी की साफ छवि और सरल व्यवहार की प्रशंसा विरोधी दलों के नेता भी करते थे। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और राजनीतिक मर्यादा की मिसाल कायम की।

अंतिम विदाई की तैयारियां पूरी

आलम बदी के निधन के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के लोगों ने उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। जानकारी के अनुसार, उन्हें आज शाम 4 बजे आजमगढ़ के हर्रा की चुंगी स्थित नई कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

 

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