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लाखों किसानों को दिलाया मालिकाना हक, प्रो. शिब्बन लाल सक्सेना का संघर्ष बना मिसाल

महराजगंज के इतिहास में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और शिक्षाविद् प्रोफेसर शिब्बन लाल सक्सेना का नाम किसानों के संघर्ष और सामाजिक बदलाव के लिए याद किया जाता है। उनके आंदोलनों और प्रयासों के परिणामस्वरूप तत्कालीन महराजगंज के करीब 1 लाख 25 हजार किसानों को उनकी जमीन पर मालिकाना हक मिलने का रास्ता साफ हुआ।

किसानों के हित में हुए इस भूमि पुनर्व्यवस्था को ‘गण्डेविया बंदोबस्त’ के नाम से जाना जाता है। किसान आंदोलनों के जरिए अंग्रेजी हुकूमत पर दबाव बनाने वाले प्रो. सक्सेना को उनके संघर्षों के कारण अखबारों ने ‘पूर्वी उत्तर प्रदेश का लेनिन’ तक कहा।बताया जाता है कि वर्ष 1937 से 1940 के बीच उन्होंने किसान आंदोलनों का नेतृत्व किया। इन आंदोलनों के बाद भूमि का दोबारा सर्वे और पुनः आवंटन कराया गया, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को जमीन पर अधिकार मिला।

13 जुलाई 1906 को जन्मे प्रो. शिब्बन लाल सक्सेना ने शिक्षा के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। महज 13 वर्ष की उम्र में जलियांवाला बाग कांड के विरोध में जुलूस का नेतृत्व करने पर उन्हें बेंत की सजा भी मिली थी।शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। वर्ष 1965 में उन्होंने महराजगंज में जवाहर लाल नेहरू पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज की स्थापना की। खेल और शिक्षा के प्रति भी उनका विशेष लगाव था।किसानों के अधिकार के लिए संघर्ष से लेकर शिक्षा के प्रसार तक, प्रो. शिब्बन लाल सक्सेना का जीवन पूर्वांचल के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।

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