राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर से जुड़े कई अहम मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों पर जोरदार हमला बोला है। जम्मू के जुवेनाइल होम से फरारी की घटना से लेकर बिहार में आरक्षण की मांग तक, उन्होंने सरकार की नीतियों और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए।
मनोज झा ने कहा कि जुवेनाइल होम जैसी संवेदनशील संस्थाओं से बच्चों का फरार होना सिस्टम की बड़ी विफलता को दर्शाता है। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसे मामलों में जवाबदेही तय क्यों नहीं होती और सुधारात्मक कदम केवल कागजों तक ही क्यों सीमित रह जाते हैं।
बिहार में आरक्षण और सामाजिक न्याय का मुद्दा
आरजेडी सांसद ने बिहार में आरक्षण से जुड़े सवालों को उठाते हुए कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई अभी अधूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। मनोज झा के अनुसार, जब तक वंचित वर्गों को उनका हक नहीं मिलेगा, तब तक समावेशी विकास केवल एक नारा बनकर रह जाएगा।
योगी के बयान, हेट स्पीच और मीट बैन पर कड़ा प्रहार
मनोज कुमार झा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयानों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों के शब्दों का समाज पर गहरा असर पड़ता है और हेट स्पीच लोकतंत्र को कमजोर करती है। इसके साथ ही बिहार में मीट बैन जैसे फैसलों को लेकर उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवनशैली पर अनावश्यक हस्तक्षेप हैं। सरकार को लोगों के खान-पान पर आदेश देने के बजाय रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और हिमाचल विधानसभा विवाद पर राय
मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि न्यायपालिका बार-बार सरकारों को संवैधानिक मर्यादाओं की याद दिला रही है, लेकिन दुर्भाग्य से उन चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विधानसभा से जुड़े विवाद पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी दलों और सरकारों की साझा जिम्मेदारी है।
सियासी हलकों में तेज हुई बहस
राष्ट्रीय और राज्य मुद्दों पर मनोज कुमार झा के इन बयानों ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है। समर्थक इसे सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की आवाज बता रहे हैं, वहीं सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करार दे रहा है।

