उत्तर प्रदेश सरकार जहां एक ओर राज्य कर्मचारियों के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना लागू करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को इस योजना का लाभ पाने के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार ने योजना की घोषणा तो कर दी, लेकिन इसके प्रभावी संचालन के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं कराया गया। यही कारण है कि कई सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा आसानी से नहीं मिल पा रही है।
लखनऊ स्थित Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences में भी इस योजना को लेकर स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, राज्य कर्मचारियों के कैशलेस इलाज के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध न होने से चिकित्सा सेवाओं के संचालन में दिक्कतें सामने आ रही हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि इलाज के दौरान उन्हें कई बार निजी खर्च उठाना पड़ रहा है, जबकि योजना का उद्देश्य उन्हें बिना नकद भुगतान के बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना था।राज्य कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि सरकार समय पर बजट जारी नहीं करती, तो योजना का लाभ केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा। उनका कहना है कि सरकार को योजना की घोषणा के साथ-साथ अस्पतालों को पर्याप्त वित्तीय सहायता भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि कैशलेस चिकित्सा योजना के लिए अलग से पर्याप्त बजट जारी किया जाए, ताकि राज्य कर्मचारियों और उनके परिवारों को समय पर इलाज मिल सके। साथ ही SGPGI समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में भुगतान और क्लेम प्रक्रिया को भी सरल बनाने की मांग की जा रही है।

