उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज शासन व्यवस्था को रिएक्टिव से प्रोएक्टिव बनाने का सशक्त माध्यम बन चुकी है। लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय ‘एआई इन ट्रांसफॉर्मिंग हेल्थकेयर’ कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में उन्होंने कहा कि जब तकनीक संवेदना से जुड़ती है, नीति नवाचार से संचालित होती है और शासन विश्वास पर आधारित होता है, तभी विकास समावेशी बनता है और भविष्य सुरक्षित होता है।
यूपी एआई मिशन के तहत 2000 करोड़ रुपये के कार्यक्रम
मुख्यमंत्री ने बताया कि यूपी एआई मिशन के अंतर्गत अगले तीन वर्षों में लगभग 2000 करोड़ रुपये के कार्यक्रम चरणबद्ध रूप से लागू किए जाएंगे। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के प्रयोग में देश का अग्रणी राज्य बनाना है। उन्होंने कहा कि एआई का प्रयोग हमें केवल प्रतिक्रिया देने वाला नहीं, बल्कि समस्याओं का पूर्वानुमान लगाकर समाधान करने वाला शासन तंत्र विकसित करने में मदद करेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं में एआई से सटीक नीति और बेहतर परिणाम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के उपयोग से नीतियां अधिक सटीक, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनेंगी। महामारी, वेक्टर जनित रोगों और अन्य बीमारियों से जुड़े डेटा का विश्लेषण कर बेहतर निर्णय और समयबद्ध हस्तक्षेप संभव होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी उन्नयन और नवाचार को लगातार प्रोत्साहित कर रही है।
प्रदेश में बन रहा आधुनिक हेल्थ-टेक इकोसिस्टम
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क, लखनऊ में मेडिटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, गौतम बुद्ध नगर में एआई एवं इनोवेशन आधारित उद्यमिता केंद्र, आईआईटी कानपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, तथा लखनऊ को एआई सिटी के रूप में विकसित करने का कार्य प्रगति पर है। ये सभी पहलें प्रदेश को हेल्थ-टेक और एआई नवाचार का केंद्र बनाएंगी।
तकनीक से बदला शासन का चेहरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने तकनीक को जमीनी स्तर तक प्रभावी रूप से लागू होते देखा है। उत्तर प्रदेश में भी पिछले आठ वर्षों में डबल इंजन सरकार ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से शासन की योजनाओं को अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में 80,000 से अधिक ई-पॉस मशीनें स्थापित की गईं, 30 लाख फर्जी राशन कार्ड चिन्हित कर हटाए गए, डीबीटी और डिजिटल ट्रांजैक्शन के माध्यम से 1.06 करोड़ परिवारों को पेंशन सीधे बैंक खातों में दी जा रही है।
स्वास्थ्य संरचना में ऐतिहासिक सुधार
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल 40 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 81 हो चुके हैं, साथ ही दो एम्स भी संचालित हैं। पहले जहां कई जिलों में आईसीयू, ऑक्सीजन प्लांट, डायलिसिस और ब्लड बैंक जैसी सुविधाओं का अभाव था, वहीं आज ये सुविधाएं हर जनपद में उपलब्ध हैं। कोविड काल में शुरू हुई वर्चुअल आईसीयू और टेली-मेडिसिन सेवाएं आज भी दूर-दराज के क्षेत्रों में लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही हैं।
इंसेफेलाइटिस और टीबी उन्मूलन में तकनीक की भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक, निगरानी और लक्षित प्रशासन के कारण प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से होने वाली मृत्यु दर शून्य हो गई है, जबकि पहले हर वर्ष 1200–1500 बच्चों की जान जाती थी। इसी प्रकार टीबी उन्मूलन में एआई आधारित टूल्स से रोगियों की पहचान, उपचार और निगरानी को प्रभावी बनाया गया है।
एआई मानव के नियंत्रण में रहे : मुख्यमंत्री
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जोर देकर कहा कि एआई का उपयोग मानव के हित में होना चाहिए। “एआई मानव द्वारा संचालित हो, मानव एआई द्वारा नहीं”-इस संतुलन को बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कॉन्फ्रेंस व्यावहारिक समाधानों, पायलट परियोजनाओं और समयबद्ध कार्ययोजना की दिशा में ठोस परिणाम देगी।
गरिमामय उपस्थिति
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा, राज्यमंत्री अजीत पाल, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल तथा अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा) अमित कुमार घोष सहित अनेक विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

