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राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के 91वें स्थापना दिवस पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शोध और नवाचार को बढ़ावा देने पर दिया जोर

राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के 91वें स्थापना दिवस पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शोध और नवाचार को बढ़ावा देने पर दिया जोर

राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के 91वें स्थापना दिवस पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शोध और नवाचार को बढ़ावा देने पर दिया जोर

कानपुर।  उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर के 91वें स्थापना दिवस समारोह को जन भवन से वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों और संस्थान के पूर्व छात्रों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने कृषि विकास, शोध, तकनीकी नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

प्रगतिशील किसानों और पूर्व छात्रों के योगदान की सराहना

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सम्मानित किसानों को बधाई देते हुए उनके कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि देशभर में अनेक किसान कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसानों को सम्मानित किया जाना सराहनीय पहल है। उन्होंने संस्थान के पूर्व छात्रों के योगदान से आयोजित संगोष्ठी को भी महत्वपूर्ण बताया। राज्यपाल ने कहा कि पूर्व छात्रों के अनुभव और विशेषज्ञता का उपयोग कृषि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान में किया जाना चाहिए। इससे किसानों को आधुनिक तकनीक, शोध और वैज्ञानिक जानकारी का लाभ मिल सकता है।

किसानों तक पहुंचाया जाए शोध और तकनीकी ज्ञान

राज्यपाल ने राष्ट्रीय शर्करा संस्थान को अपने पूर्व छात्रों की व्यवस्थित सूची तैयार रखने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि संस्थान को पूर्व छात्रों के अनुभव, विशेषज्ञता और सहयोग का उपयोग किसानों के हित में करना चाहिए, ताकि शोध से प्राप्त जानकारी का व्यावहारिक लाभ कृषि क्षेत्र तक पहुंचे। उन्होंने शोध और तकनीकी ज्ञान को किसानों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। इससे कृषि उत्पादन में सुधार, नई तकनीकों के इस्तेमाल और किसानों की समस्याओं के समाधान में मदद मिल सकती है।

 

महिला किसानों और शोधार्थियों को मिले प्रोत्साहन

आनंदीबेन पटेल ने महिला किसानों के योगदान को पहचान देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को भी सम्मानित किया जाना चाहिए, जिससे दूसरी महिलाएं प्रेरित हों और खेती में नवाचार तथा प्रगतिशील कार्यों के लिए आगे आएं। राज्यपाल ने संस्थान में शोध कर रहे विद्यार्थियों के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि शोधार्थियों के योगदान को पहचान और सम्मान मिलना जरूरी है। संस्थान को विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और उन्हें नए प्रयोगों के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में लगातार काम करना चाहिए। उन्होंने संस्थान की 90 वर्ष से अधिक की गौरवशाली यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इतने लंबे समय के बाद भी संस्थान का सक्रिय रहना और नई संभावनाओं पर काम करना गर्व की बात है।

एथेनॉल उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

राज्यपाल ने एथेनॉल के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ऐसे विकल्पों पर शोध करना आवश्यक है, जो प्रदूषण कम करने में सहायक हों। इस दिशा में वैज्ञानिकों और शोध संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि शोध एवं नवाचार करते समय मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और अन्य जीवों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। संस्थानों को देश की परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।

 

 

कोल्ड ड्रिंक के स्वस्थ विकल्प विकसित करने की जरूरत

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राष्ट्रीय शर्करा संस्थान को कोल्ड ड्रिंक के स्वास्थ्यवर्धक विकल्प विकसित करने के लिए शोध करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे पेय पदार्थों पर काम किया जाना चाहिए, जो युवाओं को बेहतर विकल्प उपलब्ध करा सकें और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करें। उन्होंने लोगों से संतुलित आहार अपनाने और नशे से दूर रहने की अपील की। राज्यपाल के अनुसार, युवाओं का स्वस्थ रहना देश के विकास के लिए आवश्यक है। स्वस्थ जीवनशैली से व्यक्ति की कार्यक्षमता बढ़ती है और समाज के विकास में उसकी भागीदारी मजबूत होती है।

नशामुक्त भारत और जनस्वास्थ्य में संस्थानों की भूमिका

राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाए जा रहे नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश को नशामुक्त बनाने में शैक्षणिक संस्थानों और शोध संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने राष्ट्रीय शर्करा संस्थान से भी इस दिशा में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। साथ ही, देश को टीबी मुक्त बनाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए जनस्वास्थ्य से जुड़े अभियानों में सहयोग करने की आवश्यकता बताई।

शोध और नवाचार से राष्ट्रहित को मिलेगी मजबूती

राज्यपाल ने वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और किसानों से नए विचारों के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की पर्यावरणीय परिस्थितियों और सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप स्वस्थ आहार एवं व्यवहार को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व को एक साथ लेकर चलने की आवश्यकता बताई। समारोह के दौरान कृषि विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान, युवाओं के स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को देश की प्रगति के महत्वपूर्ण आधार के रूप में रेखांकित किया गया।

 

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