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नीला ड्रम केस: दोषसिद्धि के बाद मुस्कान और साहिल की जेल व्यवस्था में होंगे बदलाव

नीला ड्रम केस: दोषसिद्धि के बाद मुस्कान और साहिल की जेल व्यवस्था में होंगे बदलाव

नीला ड्रम केस: दोषसिद्धि के बाद मुस्कान और साहिल की जेल व्यवस्था में होंगे बदलाव

मेरठ।  चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या तथा साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अब 14 अक्टूबर को होने वाली सजा पर निगाहें टिकी हैं। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों की जेल व्यवस्था में भी बदलाव आएगा, क्योंकि वे विचाराधीन बंदी से सिद्धदोष बंदी की श्रेणी में आ जाएंगे।

सजा के बाद बदल जाएगी बंदी की स्थिति

फिलहाल मुस्कान और साहिल विचाराधीन बंदी के तौर पर जेल में हैं। दोषसिद्धि के बाद जेल नियमों के अनुसार उनकी स्थिति सिद्धदोष बंदी की हो जाएगी। इसके साथ ही बंदियों के लिए निर्धारित जेल व्यवस्था और संबंधित नियम उन पर लागू होंगे।

मुस्कान को पहनना पड़ सकता है निर्धारित बंदी परिधान

विचाराधीन बंदियों को सामान्य तौर पर अपने कपड़े पहनने की अनुमति होती है, जबकि सिद्धदोष बंदियों के लिए जेल प्रशासन की ओर से निर्धारित परिधान की व्यवस्था होती है। ऐसे में सजा होने के बाद मुस्कान को भी महिला बंदियों के लिए निर्धारित जेल परिधान उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि निर्धारित परिधान का रंग या स्वरूप जेल प्रशासन के लागू नियमों और व्यवस्था पर निर्भर करता है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सजा के बाद हर स्थिति में उन्हें केवल सफेद साड़ी ही पहननी होगी।

 

मुस्कान और साहिल अलग-अलग जेल परिसर में रहेंगे

दोषसिद्धि के बाद दोनों की जेल व्यवस्था अलग रहेगी। मुस्कान महिला बंदियों के लिए निर्धारित परिसर में और साहिल पुरुष बंदियों के परिसर में रहेगा। जेल की सामान्य व्यवस्था के तहत दोनों के लिए अलग-अलग बैरक और निगरानी व्यवस्था लागू होगी।

जेल में निर्धारित कार्य भी मिल सकता है

सिद्धदोष बंदियों को उनकी क्षमता, स्वास्थ्य और जेल प्रशासन की व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग काम सौंपे जा सकते हैं। जेल नियमों के तहत अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल श्रेणी के कार्यों के लिए निर्धारित व्यवस्था के अनुसार पारिश्रमिक का भी प्रावधान है। महिला बंदियों के लिए जेल व्यवस्था में सिलाई-बुनाई, कपड़ों की मरम्मत, अनाज की सफाई और भोजन तैयार करने जैसे कार्य शामिल हो सकते हैं। हालांकि किसी बंदी को कौन सा कार्य दिया जाएगा, यह उसकी परिस्थितियों और जेल प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करता है।

14 अक्टूबर के फैसले पर टिकी नजर

मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला के मामले में 14 अक्टूबर को सजा सुनाई जानी है। इसके बाद उनकी बंदी की कानूनी स्थिति के साथ जेल में लागू होने वाली व्यवस्थाओं में भी बदलाव होगा। अब इस मामले में अदालत द्वारा सुनाई जाने वाली सजा और उसके बाद की जेल प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।

 

 रिपोर्ट –  गौरव चौधरी 

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