लखनऊ : ऑल इंडिया केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बड़ा कदम उठाते हुए 20 मई को देशव्यापी बंद का ऐलान किया है। एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के मौजूदा सिस्टम से पारंपरिक मेडिकल मार्केट पर गंभीर असर पड़ रहा है और नियमों का पालन भी सही तरीके से नहीं किया जा रहा है।
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि कोविड-19 के समय ऑनलाइन दवा बिक्री को अस्थायी व्यवस्था के तौर पर शुरू किया गया था, लेकिन अब यह स्थायी रूप से बढ़ती जा रही है। उनका आरोप है कि दवाओं की ऑनलाइन बिक्री में फार्मासिस्ट की निगरानी अनिवार्य होने के बावजूद कई कंपनियां इस नियम का पालन नहीं कर रही हैं।
केमिस्ट एसोसिएशन ने सवाल उठाया है कि जब पारंपरिक बाजार में लगभग 18 प्रतिशत मुनाफा तय है, तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवाएं इतनी भारी छूट के साथ कैसे बेची जा रही हैं। संगठन का कहना है कि इससे यह आशंका पैदा होती है कि या तो दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल हैं या फिर किसी प्रकार की अनियमितता हो रही है।
एसोसिएशन ने मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जाए और मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। साथ ही जीएसआर 817 और कोविड-काल में लागू किए गए जीएसआर 220 जैसे प्रावधानों को वापस लेने की भी मांग की गई है।
केमिस्ट संगठन का कहना है कि कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दी जा रही भारी छूट बाजार व्यवस्था को प्रभावित कर रही है और इससे छोटे दुकानदारों का व्यवसाय संकट में आ गया है। उनका यह भी कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म दवाएं कहां से खरीदते हैं और कैसे वितरित करते हैं, इस पर पारदर्शिता की कमी है, जिसकी जांच जरूरी है।
एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि दवा व्यवसाय एक लाइसेंस आधारित और नियंत्रित प्रणाली है, जिसमें फार्मासिस्ट की भूमिका अनिवार्य होती है। लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इस व्यवस्था के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि इमरजेंसी सेवाओं के लिए टोल-फ्री नंबर जारी किया जाएगा, जिससे मरीजों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी और किसी को असुविधा न हो।
कुल मिलाकर यह आंदोलन दवा व्यापार व्यवस्था, ऑनलाइन बिक्री नीति और पारंपरिक केमिस्ट कारोबार के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाता है, जिसका सीधा असर दवा बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

