राजधानी स्थित लोक भवन में नाबार्ड द्वारा राज्य ऋण संगोष्ठी (State Credit Seminar) 2026-27 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। संगोष्ठी के दौरान राज्य की ऋण नीति, कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने से जुड़े विषयों पर व्यापक विमर्श हुआ।
किसान, एमएसएमई और ग्रामीण विकास पर फोकस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में नाबार्ड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार किसानों, ग्रामीण उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और एमएसएमई सेक्टर को वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और एमएसएमई जैसे क्षेत्रों में आसान व सुलभ ऋण व्यवस्था विकास की गति को तेज करती है।
राज्य क्रेडिट सेमिनार 2026-27 से मिला विकास का रोडमैप
सीएम योगी ने कहा कि राज्य क्रेडिट सेमिनार 2026-27 ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक ठोस रोडमैप प्रस्तुत करता है। उन्होंने बैंकिंग संस्थानों से आग्रह किया कि प्राथमिकता क्षेत्र में ऋण वितरण को बढ़ाया जाए, ताकि गांवों में रोजगार के नए अवसर सृजित हों और आत्मनिर्भरता को बल मिले।
कानून-व्यवस्था में सुधार से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि बीते वर्षों में प्रदेश की कानून-व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है। बेहतर बुनियादी ढांचे और निवेश-अनुकूल नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश आज निवेशकों के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव कृषि और ग्रामीण विकास पर भी पड़ा है।
स्टेट फोकस पेपर 2026-27 का प्रस्तुतीकरण
कार्यक्रम के दौरान नाबार्ड द्वारा स्टेट फोकस पेपर 2026-27 प्रस्तुत किया गया, जिसमें कृषि, ग्रामीण विकास और वित्तीय समावेशन से जुड़े लक्ष्य तय किए गए हैं। संगोष्ठी में वरिष्ठ अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
समावेशी विकास की दिशा में अहम कदम
नाबार्ड राज्य ऋण संगोष्ठी 2026-27 को उत्तर प्रदेश की आर्थिक मजबूती, ग्रामीण सशक्तिकरण और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

