लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र में व्यापक और दीर्घकालिक सुधारों को मजबूती देने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के 70 जनपदों में संचालित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) के कुल 3,346 पदों के स्थायीकरण का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इस फैसले को प्रदेश की शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था, शैक्षणिक अनुसंधान और अकादमिक नेतृत्व को नई मजबूती देने वाला ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार वर्षों से अस्थायी रूप से संचालित शैक्षणिक, तकनीकी और प्रशासनिक पदों को अब स्थायी स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इससे DIET संस्थानों की कार्यक्षमता, जवाबदेही और प्रशासनिक स्थिरता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
शिक्षा सुधारों को मिल रहा संस्थागत आधार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों का दायरा लगातार बढ़ा है। स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा, निपुण भारत मिशन, नई शिक्षा नीति-2020, बाल वाटिका और शिक्षक प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों के साथ अब उन संस्थानों को भी मजबूत किया जा रहा है जो शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
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DIET संस्थान प्रदेश में शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक अनुसंधान, पाठ्यचर्या क्रियान्वयन और अकादमिक मार्गदर्शन का प्रमुख केंद्र हैं। ऐसे में पदों के स्थायीकरण से इन संस्थानों को स्थायी मानव संसाधन संरचना मिलेगी, जिससे शिक्षा सुधार कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
प्राचार्य से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक सभी पद होंगे स्थायी
सरकार के निर्णय के तहत कुल 3,346 पदों का स्थायीकरण किया जाएगा। इनमें—
70 प्राचार्य
70 उप प्राचार्य
420 वरिष्ठ प्रवक्ता
1,190 प्रवक्ता
70 सांख्यिकीविद
70 कार्यानुभव शिक्षक
70 तकनीकी सहायक
70 कार्यालय अधीक्षक
70 पुस्तकालयाध्यक्ष
70 लेखाकार
70 आशुलिपिक
630 लिपिक
126 प्रयोगशाला सहायक
350 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं।
वर्षों पुरानी अस्थायी व्यवस्था को मिला स्थायी स्वरूप
शासनादेश के अनुसार संबंधित पद वर्ष 1989, 1990, 1995 और 2004 में विभिन्न चरणों में सृजित किए गए थे और लंबे समय से अस्थायी व्यवस्था के तहत संचालित हो रहे थे। शिक्षा व्यवस्था में इन पदों की निरंतर आवश्यकता और महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए सरकार ने इन्हें स्थायी करने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे DIET संस्थानों की प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन में दीर्घकालिक स्थिरता आएगी।
नई शिक्षा नीति और निपुण भारत मिशन को मिलेगा बल
प्रदेश में नई शिक्षा नीति-2020, निपुण भारत मिशन, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN), बाल वाटिका और क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन में DIET संस्थानों की अहम भूमिका है।पदों के स्थायीकरण से शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक नवाचार, अनुसंधान आधारित शिक्षण और गुणवत्ता सुधार कार्यक्रमों को नई गति मिलेगी। इससे प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के प्रयासों को संस्थागत मजबूती प्राप्त होगी।
शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा दीर्घकालिक लाभ
योगी सरकार का यह निर्णय केवल प्रशासनिक सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को स्थायी, आधुनिक और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह पहल प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने, शिक्षण गुणवत्ता सुधारने और शिक्षा क्षेत्र में बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

