पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड के यमकेश्वर स्थित इंटर कॉलेज के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण समारोह भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस अवसर पर योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा, संस्कृति और आत्मनिर्भरता के महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और व्यावहारिक कौशल से विद्यार्थियों को सशक्त बनाना है।
संस्कृति और विकास का समन्वय
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भौतिक विकास ही जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए। सार्थक विकास वही है जो हमारी सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों का संरक्षण करते हुए आगे बढ़े। उन्होंने यमकेश्वर क्षेत्र के ऐतिहासिक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए बताया कि 1965 में जहां बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, वहीं आज क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
शिक्षा और संस्कारों की भूमिका
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विद्यालय केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें संस्कार, व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकास का केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास और स्किल डेवलपमेंट को समय की आवश्यकता बताया। साथ ही, उन्होंने प्राचीन गुरुकुल परंपरा की सराहना की, जो विद्यार्थियों को जीवन की हर चुनौती के लिए तैयार करती थी।
छात्रों के लिए ‘अभ्युदय’ जैसी पहल
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की ‘अभ्युदय’ कोचिंग योजना का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे प्रशासनिक अधिकारी और डॉक्टर प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे NEET और IIT-JEE की तैयारी में छात्रों का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान राजस्थान सरकार से समन्वय कर कोटा में फंसे उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के छात्रों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
ग्राम स्वराज और आत्मनिर्भरता का आह्वान
अपने बचपन की स्मृतियों को साझा करते हुए योगी आदित्यनाथ ने गांवों से हो रहे पलायन पर चिंता जताई और ‘ग्राम स्वराज’ की परिकल्पना को साकार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीण अपनी समस्याओं का समाधान मिल-जुलकर करते थे, जिससे आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत होती थी। इसी परंपरा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।
स्थानीय संभावनाओं पर जोर
मुख्यमंत्री ने यमकेश्वर क्षेत्र की प्राकृतिक शुद्धता और सुंदरता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां की शुद्ध हवा और जल अद्वितीय हैं। उन्होंने शिक्षण संस्थानों को बागवानी, आधुनिक कृषि और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने का सुझाव दिया, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हो सकें।
संस्थापक को श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने विद्यालय के संस्थापक स्व. सोहम सिंह चौहान को श्रद्धांजलि अर्पित की और विश्वास व्यक्त किया कि इस संस्थान से शिक्षित विद्यार्थी देश और समाज की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

