लखनऊ: जन भवन के गांधी सभागार में ‘क्षमावाणी पर्व एवं त्यागी व्रती सम्मान, मिच्छामि दुक्कडम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया और त्यागी-व्रतीजनों को सम्मानित किया।
क्षमा को बताया भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि क्षमा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि ऐसी मानवीय भावना है जो रिश्तों में आई दूरी को कम करने और मन में मौजूद कटुता को दूर करने का माध्यम बनती है। उन्होंने प्रेम, ज्ञान, संवेदनशीलता और सहिष्णुता को जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्यपाल ने जैन दर्शन के संदर्भ में कहा कि वास्तविक आत्मविजय बाहरी उपलब्धियों से अधिक अपने क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह पर नियंत्रण पाने में है। उन्होंने त्यागी-व्रतीजनों को संयम और साधना की परंपरा का उदाहरण बताया।
अहिंसा और अनेकांतवाद के महत्व पर चर्चा
आनंदीबेन पटेल ने जैन धर्म के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए अहिंसा, सत्य, संयम और साधना को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन का अनेकांतवाद अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझने की सीख देता है और यह विचार भारत की बहुलतावादी संस्कृति से जुड़ा हुआ है। उन्होंने जैन धर्म के साहित्य, कला और वास्तुकला में योगदान का भी उल्लेख किया। दिलवाड़ा के मंदिरों और श्रवणबेलगोला की प्रतिमाओं को उन्होंने भारतीय कला एवं आध्यात्मिक परंपरा के महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
अपरिग्रह और संतोष पर दिया जोर
राज्यपाल ने कहा कि जैन दर्शन का अपरिग्रह सिद्धांत वर्तमान उपभोक्तावादी दौर में भी महत्वपूर्ण है। आवश्यकता के अनुरूप संग्रह और संतोष की भावना व्यक्ति को संयमित जीवन की ओर ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि देश के विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से जुड़े रहना भी जरूरी है। उनके अनुसार आर्थिक प्रगति के साथ नैतिकता, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
‘मिच्छामि दुक्कडम’ को बताया आत्मशुद्धि का मार्ग
राज्यपाल ने ‘मिच्छामि दुक्कडम’ की भावना को आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि से जोड़ते हुए कहा कि मन, वचन या कर्म से हुई भूलों के लिए क्षमा मांगना और दूसरों को क्षमा करना इस परंपरा का महत्वपूर्ण संदेश है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को पुरानी कटुता छोड़कर मन को निर्मल रखने का प्रयास करना चाहिए। क्षमावाणी का उद्देश्य आपसी सद्भाव, करुणा और आत्मसंयम को मजबूत करना है।
जन भवन की गतिविधियों की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने जन भवन में संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों और नवाचारों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि यहां संचालित आदर्श माध्यमिक विद्यालय में वंचित परिवारों के 422 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इन बच्चों के नामांकन और शिक्षा के साथ उनके सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने जन भवन में गौ सेवा, स्वास्थ्य परीक्षण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों का भी उल्लेख किया। राज्यपाल के अनुसार परिसर में करीब 20 हजार पौधे लगाए गए हैं और बोनसाई गार्डन भी विकसित किया गया है।
सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने पर जोर
राज्यपाल ने बताया कि जन भवन में खेल प्रतियोगिताओं सहित कई गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग और स्कूली बच्चे हिस्सा लेते हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से जन भवन का भ्रमण करने और बच्चों को यहां की गतिविधियों से परिचित कराने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन के आयोजकों को आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं और क्षमा, संयम, करुणा तथा सद्भाव की भावना को समाज में आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

