उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) पदों पर तैनाती को लेकर चल रही प्रक्रिया पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। सूत्रों के अनुसार, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य द्वारा भेजी गई 24 चिकित्सकों की सूची, जिसमें 8 अधिकारियों को सीएमओ बनाए जाने का प्रस्ताव था, उसे मुख्यमंत्री कार्यालय ने वापस कर दिया है।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पिछले छह महीनों के दौरान रिक्त जनपदों में सीएमओ तैनाती को लेकर कई बार नामों के प्रस्ताव और निर्देश स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए थे, लेकिन विभागीय स्तर पर उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इतना ही नहीं, हाल ही में भेजी गई सूची में मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा पूर्व में सुझाए गए नामों को भी शामिल नहीं किया गया, जिसके बाद शासन स्तर पर नाराजगी बढ़ गई।
सूत्रों के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग पर यह आरोप भी लग रहे हैं कि उच्च स्तर के अधिकारी जिनकी सेवानिवृत्ति कुछ माह शेष है उनके द्वारा महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती मे पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदारी देने की कोशिश की जा रही थी। इसी वजह से मुख्यमंत्री कार्यालय ने फाइल को वापस करते हुए योग्य अधिकारियों को तैनात करने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचने के बाद शासन स्तर पर गंभीरता से लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों पर मनमाने ढंग से फैसले लेने, पसंदीदा अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात करने और भ्रष्टाचार के आरोपों की भी चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों का कहना है कि अब मुख्यमंत्री कार्यालय पूरे मामले की दोबारा समीक्षा कर रहा है और पूर्व में दिए गए निर्देशों व प्रस्तावों के आधार पर नए सिरे से नियुक्तियों पर फैसला लिया जा सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग में प्रस्तावित तबादलों और नियुक्तियों को लेकर फिलहाल असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

