वाराणसी : मोक्ष और नर्क के पौराणिक द्वार के बीच बसी काशी में हरि और हर एक साथ विराजेंगे यानी की काशी में अब जय विश्वनाथ के साथ जय जगन्नाथ की गूंज सुनाई देगी! जगन्नाथ करिडोर का निर्माण काशी के दक्षिणी छोर पर जगन्नाथ कॉरिडोर शुरू हो गया है, जिसका भूमि पूजन कांची कामकोटी पीठ के पीठाधीश्वर और शंकराचार्य स्वामी विजयेंन्द्र सरस्वती ने किया था! अस्सी स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर को अब काशी कॉरिडोर के तर्ज पर विकसित किया जाएगा! जगन्नाथ कॉरिडोर कैसा होगा इसका फर्स्ट लुक भी सामने आ गया है!
राजस्थान के धौलपुर के पत्थरों से इस कॉरिडोर का निर्माण होगा! मंदिर ट्रस्ट ने इसके लिए लाखों घन फुट पत्थर मंगाए है! धौलपुर के पत्थरों की खास बात यह है कि यह लाल, गुलाबी और सफेद रंग में उपलब्ध है! दीवारों पर खूबसूरत नक्काशी,फर्श और दीवारों के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है! ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी के सचिव शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि नए जगन्नाथ कॉरिडोर में मुख्य परिसर 1 लाख स्क्वायर फीट से अधिक का होगा! मुख्य परिसर में भगवान जगन्नाथ के मंदिर के अलावा गरुड़ मंदिर, नरसिंह मंदिर के अलावा अन्य देव विग्रह होंगे! इसके अलावा मुख्य मंदिर का शिखर 108 फीट का होगा! जिसका दर्शन भक्त गंगा तट से भी कर पाएंगे!
जगन्नाथ मंदिर मौजूदा समय में गंगा के किनारे अस्सी घाट पर स्थित है! मंदिर अति प्राचीन होने के साथ-साथ अति जिर्ण-सिर्ण अवस्था में भी पड़ा है! जिसके पुनरोद्धार का काम शुरू हो चुका है हालांकि प्रस्तावित जगन्नाथ करिडोर में दर्जन भर परिवार दो-तीन पीढियां से निवास कर रहा हैं! निवास करने वाले लोगों का आरोप है कि ट्रस्ट की ओर से हमको जबरन धमकी देकर निकाला जा रहा है!
प्रस्तावित जगन्नाथ कॉरिडोर परिसर में रह रहे लोगों के बारे में जब मंदिर ट्रस्ट के सचिव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि लोगों के योग्यता और क्षमता के अनुसार प्रस्तावित करिडोर में लोगों को रखा जाएगा ताकि उनका जीवन यापन चलता रहे! जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के सचिव ने ये भी बताया कि कुछ लोगों ने इस पर जबरन कब्जा किया है ताकि मंदिर जीर्णोद्धार में खलल डाला जा सके!
काशी खंड में स्थित इस मंदिर को लेकर तमाम तरह की बातें सामने आती है मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह मंदिर करीब 300 साल पुराना है जो नागरगर शैली में निर्मित है इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जगन्नाथ मंदिर के पुजारी जब काशी आए तो उनके लिए प्रसाद भी वहां से आता था लेकिन तत्तसमय नदियों में बाढ़ के चलते प्रसाद नहीं आ पाया इसके बाद पुजारी के स्वप्न में भगवान आते हैं और उनका यही मंदिर स्थापित करने की बात कहते हैं तभी से इस मंदिर की स्थापना काशी में की गई है!
जगन्नाथ मंदिर न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष ने बृजेश सिंह बताया कि काशी में हरि और हर एक साथ नजर आएंगे! काशी शिव की अति प्राचीन राजधानी है जिसमें सभी देवताओं का वास होता है! और यहां पर भोलेनाथ भगवान विष्णु के साथ मिलकर अपने भक्तों का बेड़ा पार लगाएंगे जिसकी आकांक्षा में इस भव्य मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है!

