उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक पहल की गई। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रौता पार मुहल्ले में निर्मित उत्तर प्रदेश के तीसरे गरिमा गृह का उद्घाटन कर इसे किन्नर समाज को समर्पित किया। इस गरिमा गृह के माध्यम से अब ट्रांसजेंडर समुदाय को प्रशिक्षण, चिकित्सीय सुविधाएं और सरकार की विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
मंच से जनता से सीधा संवाद, ट्रांसजेंडर बच्चों को अपनाने की अपील
उद्घाटन के बाद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंच से आमजन से सीधा संवाद किया और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए। माधव प्रसाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडर का जन्म मां के गर्भ से ही होता है, यह कोई कमाई का साधन नहीं है। उन्होंने समाज से अपील की कि यदि किसी परिवार में ट्रांसजेंडर बच्चे का जन्म हो, तो उसे घर में रखें और सम्मान दें। पड़ोस और समाज को ताने-टिप्पणी करने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसे बच्चों को अपनाना पुण्य का कार्य है।
परिवार से ही शुरू होता है भेदभाव
सभा में आशा दुबे ने सवाल उठाया कि ट्रांसजेंडरों के साथ भेदभाव की शुरुआत अक्सर परिवार से होती है। इस पर राज्यपाल ने कहा कि कई परिवार अपने बच्चों का पालन-पोषण अच्छे से करते हैं, लेकिन सामाजिक दबाव और तानों के कारण कुछ लोग बच्चों को घर से निकाल देते हैं, जो गलत है। उन्होंने कहा कि जो ट्रांसजेंडर परिवार से अलग हो चुके हैं, उनके लिए पंजीकरण और पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है।
रोजगार और सम्मान का रास्ता
राज्यपाल ने इंद्रा चैरिटेबल ट्रस्ट के अजय पांडेय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि कई ट्रांसजेंडरों को होटल, गोशाला और अन्य संस्थानों में सम्मानजनक रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडर काम करना चाहते हैं, लेकिन अवसर न मिलने के कारण कई बार उन्हें भीख मांगनी पड़ती है। यदि उन्हें सिलाई, हुनर और रोजगार का प्रशिक्षण दिया जाए, तो वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
शिक्षा पर विशेष जोर, पुलिस भर्ती तक की बात
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि ट्रांसजेंडर बच्चों की शिक्षा के लिए कक्षाओं की व्यवस्था की गई है। उन्होंने अपील की कि कम से कम उन्हें स्नातक तक शिक्षा दिलाई जाए और वे नौकरी भी करें। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ट्रांसजेंडरों की पुलिस भर्ती जैसे अवसर भी खुलेंगे, इसलिए उन्हें अनपढ़ नहीं रहना चाहिए।
प्रधानमंत्री की पहल का किया उल्लेख
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि पहले सरकारें स्कूल और शिक्षा पर बजट देती थीं, लेकिन ट्रांसजेंडर समुदाय तक लाभ नहीं पहुंच पाता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्थिति को समझते हुए नीतियां बनाई और बजट की व्यवस्था की, जिससे ट्रांसजेंडरों को गरिमा और सम्मान मिल सके।
बस्ती से शुरू हुआ अभियान बनेगा प्रदेशव्यापी
राज्यपाल ने कहा कि बस्ती से शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में अन्य जिलों तक भी पहुंचेगी। उन्होंने समाज से अपील की कि ट्रांसजेंडर समुदाय को अपने घरों में बुलाएं, उन्हें सम्मान दें और आत्मनिर्भर बनने में सहयोग करें। बस्ती में गरिमा गृह का उद्घाटन ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मान, आत्मनिर्भरता और मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक मजबूत और प्रेरणादायी कदम साबित हुआ है।

