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जनगणना-2027 को लेकर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की अहम अपील, बोलीं- कोई भी परिवार गणना से न छूटे

जनगणना-2027 को लेकर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की अहम अपील, बोलीं- कोई भी परिवार गणना से न छूटे

जनगणना-2027 को लेकर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की अहम अपील, बोलीं- कोई भी परिवार गणना से न छूटे

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जनगणना-2027 को देश और प्रदेश के विकास की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण अभियान बताया है। लखनऊ स्थित जन भवन में जनगणना के दूसरे चरण को लेकर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से पूरी पारदर्शिता, सटीकता और जिम्मेदारी के साथ गणना का कार्य पूरा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनगणना के आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं, बजट निर्धारण और सरकारी संसाधनों के उचित वितरण का आधार बनेंगे।

16 नवंबर से शुरू होगी स्वगणना की प्रक्रिया

राज्य में जनगणना-2027 के तहत स्वगणना का कार्य 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक निर्धारित किया गया है। इसके बाद 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक जनसंख्या गणना की जाएगी। राज्यपाल ने बताया कि जनगणना दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में मकानों से संबंधित जानकारी जुटाई गई है, जबकि दूसरे चरण में लोगों की जनसंख्या से जुड़े आंकड़े एकत्र किए जाएंगे।

 

विकास योजनाओं के लिए जरूरी हैं सटीक आंकड़े

आनंदीबेन पटेल ने कहा कि जनगणना के जरिए यह पता चलता है कि किस क्षेत्र में किन सुविधाओं की अधिक जरूरत है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, रोजगार, दवा और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं की योजनाएं तैयार करने में इन आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने जोर दिया कि गणना के दौरान किसी भी व्यक्ति या परिवार को छूटने नहीं देना चाहिए और सभी जानकारियां सही तरीके से दर्ज की जानी चाहिए।

गुजरात में महिला साक्षरता बढ़ाने का साझा किया अनुभव

कार्यक्रम में राज्यपाल ने गुजरात में शिक्षा मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में गुजरात में महिला साक्षरता दर करीब 59 प्रतिशत थी। कई जिलों में बालिका शिक्षा की स्थिति काफी कमजोर थी। इसके पीछे स्कूलों की दूरी, जागरूकता की कमी और सामाजिक सोच जैसी चुनौतियां थीं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए लगातार छह वर्षों तक अभियान चलाया गया। गांवों में शिक्षकों की नियुक्ति, बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन और पाठ्यपुस्तक, छात्रवृत्ति व यूनिफॉर्म समय पर उपलब्ध कराने जैसे कदम उठाए गए। प्रवेश उत्सव के माध्यम से अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया। इन प्रयासों से महिला साक्षरता दर में बढ़ोतरी होकर लगभग 92 प्रतिशत तक पहुंच गई।

 

लिंगानुपात और ड्रॉपआउट दर में सुधार पर भी दिया जोर

राज्यपाल ने बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की आवश्यकता बताते हुए गुजरात में लिंगानुपात सुधारने के प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जागरूकता अभियानों के परिणामस्वरूप लिंगानुपात 994 तक पहुंचा। वहीं, स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने के प्रयासों से ड्रॉपआउट दर घटकर 0.9 प्रतिशत रह गई।

 

 

आवास और महिलाओं के नाम पर मकानों का भी जुटाया जाए डेटा

आनंदीबेन पटेल ने कहा कि जनगणना में मकानों से जुड़ी जानकारियों का सही संकलन बेहद जरूरी है। इसके तहत यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि कितने मकान महिलाओं के नाम पर हैं और प्रदेश में कितने वृद्धाश्रम संचालित हो रहे हैं। वृद्धाश्रमों में रहने वाले लोगों से संबंधित जानकारी भी जरूरतमंद वर्गों की पहचान करने में मददगार साबित हो सकती है।

अधिकारियों को समयबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश

राज्यपाल ने जनगणना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को अभी से बेहतर प्रबंधन और कार्ययोजना तैयार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गणना पूरी होने के बाद आंकड़ों का गंभीरता से विश्लेषण किया जाना चाहिए, ताकि जरूरत के अनुसार विकास योजनाएं बनाई जा सकें। विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के पुराने भवनों तथा वहां उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति का आकलन करने पर भी उन्होंने बल दिया।

विकसित भारत के निर्माण में जनगणना की अहम भूमिका

राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब प्रत्येक नागरिक को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलें। इसके लिए जनसंख्या और स्थानीय जरूरतों की सही जानकारी होना आवश्यक है। उन्होंने जनगणना को केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और विकास को गति देने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

 

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