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Lucknow: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एकेटीयू में दो दिवसीय ‘AI मंथन 2026’ कार्यशाला का किया शुभारम्भ

प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय एआई मंथन 2026 कार्यशाला का शुभारम्भ किया। यह कार्यशाला डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर में आयोजित की गई, जिसका विषय उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चुनौतियां एवं संभावनाएं रहा।

एआई से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने पर जोर

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में राज्यपाल ने कहा कि विभिन्न विभागों की जमीनी समस्याओं को विश्वविद्यालयों तक पहुंचाकर उनके समाधान के लिए अकादमिक प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने नई नीतियों के त्वरित निर्माण के साथ-साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि एआई के माध्यम से शिक्षा, प्रशासन और शोध में गुणवत्ता और पारदर्शिता लाई जा सकती है।

दो दिनों तक चलेगा एआई पर मंथन

विशेष कार्याधिकारी (राज्यपाल) डॉ. सुधीर एम. बोबडे ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि दो दिनों में विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से एआई के व्यावहारिक और नीतिगत पहलुओं पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि यह मंथन न केवल उच्च और तकनीकी शिक्षा को नई दिशा देगा, बल्कि युवाओं के लिए नवाचार और अवसरों का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

एआई आधारित शिक्षा प्रणाली पर फोकस

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि राज्यपाल के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा एआई के माध्यम से नए मानक स्थापित करने की ओर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार एआई विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में कार्य कर रही है, जो शोध और नवाचार के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

भारत को आत्मनिर्भर एआई की ओर बढ़ना होगा

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि एआई करिकुलम के माध्यम से उच्च शिक्षा में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव है। उन्होंने बताया कि भारत एआई के क्षेत्र में अपने मॉडल विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है, ताकि वैश्विक निर्भरता कम की जा सके। एआई आधारित ऐप्स, फेलोशिप, डेटा लैब्स और छात्र प्रशिक्षण पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

उच्च शिक्षा में एआई के व्यावहारिक अनुप्रयोग

आईआईटी खड़गपुर के प्रो. पी.पी. चक्रबर्ती ने आत्मनिर्भर एआई को भारत के लिए अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि एआई के माध्यम से बहु-क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान संभव है। उन्होंने एआई और मशीन लर्निंग के जरिए शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

हैंड्स-ऑन सेशंस और पैनल डिस्कशन

कार्यशाला के दौरान कलाम सेंटर के संस्थापक सृजनपाल सिंह ने एआई टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया और प्रॉम्प्टिंग की तकनीकी बारीकियों को समझाया। वहीं, मीडिया और सोशल मीडिया में एआई की भूमिका पर राइस फाउंडेशन के संस्थापक मधुकर वार्ष्णेय ने जानकारी साझा की। दूसरे सत्र में टीसीएस के सीटीओ डॉ. हैरिक विन, एक्सेंचर, गिगनाती और नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने एआई, साइबर सुरक्षा, गवर्नेंस और शैक्षणिक एनालिटिक्स पर अपने विचार रखे।

एआई आधारित स्टार्टअप प्रदर्शनी का अवलोकन

इस अवसर पर राज्यपाल ने एआई आधारित स्टार्टअप प्रदर्शनी के विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया और नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने युवाओं द्वारा विकसित एआई समाधानों की सराहना की।

शिक्षाविदों और कुलपतियों की व्यापक भागीदारी

कार्यशाला में प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल सहित प्रदेश के 27 राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, वित्त अधिकारी, शिक्षकगण और विषय-विशेषज्ञ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यशाला के विभिन्न सत्रों का संचालन डॉ. अनुज कुमार शर्मा, डॉ. अंशु सिंह और डॉ. रितेश मौर्य द्वारा किया गया।

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