उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में विश्वविद्यालय की महिला शिक्षिकाओं के साथ आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन भी उपस्थित रहीं। संवाद का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार तथा समाजोपयोगी गतिविधियों में महिला शिक्षकों के योगदान को जानना एवं उन्हें प्रोत्साहित करना रहा।
महिला सशक्तिकरण और पारिवारिक परामर्श की प्रेरक पहल
शिक्षाशास्त्र विभाग की सहायक आचार्य डॉ. मीतू सिंह ने महिलाओं और युवतियों के सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन से जुड़े मुद्दों पर किए जा रहे अपने कार्यों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वैवाहिक विवाद, घरेलू हिंसा, मानसिक तनाव, अवसाद तथा पारिवारिक मतभेद जैसे मामलों में नियमित काउंसलिंग के माध्यम से अब तक लगभग 20 महिलाओं एवं युवतियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया गया है। वर्तमान में भी कई मामलों में परामर्श प्रक्रिया जारी है, जिससे परिवारों को टूटने से बचाने और महिलाओं को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है।
डिजिटल शिक्षा को नई दिशा दे रहा ‘ScholarsDesk’ प्लेटफॉर्म
व्यवसाय प्रशासन विभाग की सहायक आचार्य डॉ. कृतिका श्रीवास्तव ने अपने सहयोगी डॉ. मोहम्मद इरफान के साथ विकसित किए गए “ScholarsDesk” लर्निंग मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मंच विद्यार्थियों को SWAYAM पाठ्यक्रमों में नामांकन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी उपयोग, उपयुक्त ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के चयन, वास्तविक एवं फर्जी Scopus जर्नलों की पहचान तथा शोध एवं अकादमिक गतिविधियों से संबंधित आवश्यक जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराता है।
सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान
प्राणी विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. तान्या त्रिपाठी ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए विश्वविद्यालय द्वारा संचालित HPV टीकाकरण अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डी.डी.यू. पुलिस के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में किशोरियों एवं महिलाओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम और टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के नए मामलों, मृत्यु दर एवं उपचार के दौरान छूट जाने वाले मामलों के वैज्ञानिक सर्विलांस की योजना भी तैयार की जा रही है।
कृषि एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए अभिनव प्रयास
प्राकृतिक एवं कृषि विज्ञान संस्थान की सहायक आचार्य डॉ. नूपुर सिंह और डॉ. मोनालिसा साहू ने कृषि विकास एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित अपने शोध एवं जनजागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान सतत कृषि, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
इंजीनियरिंग शिक्षा में आधुनिक पाठ्यक्रमों का विस्तार
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग की सहायक आचार्य डॉ. शगुन पाल ने बताया कि विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस (AIDS) तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग (AIML) जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। इसके साथ ही इंजीनियरिंग विषयों में पीएच.डी. कार्यक्रम की शुरुआत से अनुसंधान एवं नवाचार को नई गति मिली है। इन पाठ्यक्रमों के प्रति विद्यार्थियों का उत्साह विश्वविद्यालय की बढ़ती शैक्षणिक गुणवत्ता का परिचायक है।
फार्मेसी शिक्षा एवं अनुसंधान की उपलब्धियां साझा कीं
फार्मेसी संस्थान की सहायक आचार्य डॉ. सरिता सिंह ने विश्वविद्यालय में फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में हो रहे कार्यों तथा संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने अपने शैक्षणिक एवं शोध अनुभव भी साझा किए।
राज्यपाल ने दिए नवाचार और सामाजिक विकास के महत्वपूर्ण सुझाव
महिला शिक्षिकाओं के कार्यों की सराहना करते हुए राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता के साथ Soil Testing Laboratory तथा Zero Waste Campus Centre जैसी पहलों को संस्थागत रूप देने का सुझाव दिया, ताकि पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को और मजबूत किया जा सके।
वंचित बालिकाओं के सशक्तिकरण पर विशेष जोर
राज्यपाल ने जरूरतमंद एवं वंचित बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास के लिए प्रभावी योजनाएं संचालित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शिक्षिकाओं से समाज के कमजोर वर्गों तक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता कार्यक्रमों को पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
सतत विकास में वाणिज्य शिक्षा की भूमिका महत्वपूर्ण
संवाद के दौरान राज्यपाल ने कहा कि Sustainable Business की अवधारणा को सफल बनाने में वाणिज्य शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा, नवाचार, उद्यमिता और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के समन्वित प्रयासों से ही सतत एवं समावेशी विकास का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
कुलपति ने व्यक्त किया आभार
कार्यक्रम के अंत में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने राज्यपाल के मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी सुझावों के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्यपाल द्वारा दिए गए सुझावों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं सामाजिक गतिविधियों में प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा, जिससे विश्वविद्यालय उत्कृष्टता और सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

