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बुंदेलखंड की कला और युवा उद्यमिता से रूबरू हुईं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, ‘बुंदेली वसुधा’ प्रदर्शनी का किया अवलोकन

झांसी। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के 31वें दीक्षोत्सव के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित ‘बुंदेली वसुधा’ सात दिवसीय कला प्रदर्शनी एवं कार्यशाला और विभिन्न स्टार्टअप्स की प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों और प्रतिभागी कलाकारों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए उन्हें पारंपरिक कला को समकालीन दृष्टिकोण और नए प्रयोगों से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने युवा उद्यमियों से संवाद कर उनके नवाचार, कार्यों, रोजगार सृजन और भविष्य की संभावनाओं की जानकारी ली तथा उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन और प्रोत्साहन दिया। 100 से अधिक कलाकृतियां बनीं आकर्षण ललित कला संस्थान, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित ‘बुंदेली वसुधा’ प्रदर्शनी में बुंदेलखंड की कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक स्मृतियों को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों और प्रतिभागी कलाकारों की 100 से अधिक कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं।इनमें चित्रकला, रंगोली कला, वस्त्र सज्जा, पिछवाई कला, कैंडल आर्ट, रेजिन आर्ट, पोर्ट्रेट और गृह सज्जा सहित कई कला विधाओं की रचनाएं शामिल रहीं।कलाकारों ने बुंदेलखंड के लोकजीवन, प्राकृतिक परिवेश, सांस्कृतिक प्रतीकों और क्षेत्रीय सौंदर्यबोध को अपनी रचनाओं का आधार बनाया। पारंपरिक विषयों को आधुनिक तकनीकों और नए माध्यमों से प्रस्तुत किए जाने के कारण प्रदर्शनी में परंपरा और समकालीनता का सुंदर संगम देखने को मिला।

रंगोली से बने पोर्ट्रेट ने खींचा ध्यान

प्रदर्शनी में रंगोली के माध्यम से तैयार किए गए पोर्ट्रेट विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। रंगोली कलाकार गजेंद्र सिंह, काजल ओझा, आदर्श अहिरवार और निशा अहिरवार ने रंगों और सूक्ष्म संयोजन से पोर्ट्रेट तैयार किए।राज्यपाल ने इन कलाकृतियों में विशेष रुचि दिखाई और विद्यार्थियों से इनके निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। उन्होंने विद्यार्थियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए नए प्रयोग जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

पिछवाई कला ने भी बटोरी सराहना

राजस्थान के भीलवाड़ा से आमंत्रित वरिष्ठ कलाकार एवं पिछवाई कला विशेषज्ञ दिनेश सोनी की कलाकृतियां भी प्रदर्शनी में प्रमुख आकर्षण रहीं। उनकी रचनाओं में पिछवाई कला की विशिष्ट शैली, सूक्ष्म रेखांकन, रंग संयोजन और सांस्कृतिक विषयवस्तु देखने को मिली।राज्यपाल ने कहा कि पारंपरिक कला विधाएं केवल अतीत की विरासत नहीं हैं, बल्कि उनमें आधुनिक समय के अनुरूप नए प्रयोग और अभिव्यक्ति की व्यापक संभावनाएं भी मौजूद हैं।

कला शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण का संगम

‘बुंदेली वसुधा’ कार्यशाला में स्थानीय कला और संस्कृति को विश्वविद्यालय की कला शिक्षा से जोड़ा गया। विद्यार्थियों को कला-सृजन की व्यावहारिक प्रक्रिया समझने, वरिष्ठ कलाकारों से संवाद करने और विभिन्न कला माध्यमों में प्रयोग करने का अवसर मिला।इस पहल से विद्यार्थियों में स्थानीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति समझ और संवेदनशीलता बढ़ाने के साथ अपनी कला को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का आत्मविश्वास भी विकसित हुआ।

स्टार्टअप्स में दिखी युवा प्रतिभा

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शित विभिन्न स्टार्टअप्स का भी अवलोकन किया। उन्होंने स्टार्टअप टीमों से बातचीत कर उनके नवाचार, रोजगार सृजन और भविष्य की संभावनाओं के बारे में जानकारी ली।उन्होंने युवाओं को उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

महिलाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर

राज्यपाल ने सराहना हैंडीक्राफ्ट की टीम से मुलाकात की। टीम ने बताया कि फैशन इंडस्ट्री के आधुनिक आयामों और डिजाइन के जरिए बेहतरीन फैब्रिक को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।राज्यपाल ने इस पहल को ‘वोकल फॉर लोकल’ और बुंदेलखंड की समृद्ध संस्कृति को बढ़ावा देने वाला प्रयास बताया। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी बढ़ाने तथा अधिक से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार एवं रोजगार से जोड़ने का सुझाव दिया।

शतरंज स्टार्टअप को अंतरराष्ट्रीय विस्तार की सलाह

स्ट्रैटेजिक माइंड चेस प्राइवेट लिमिटेड (एसएमसी) की टीम से राज्यपाल ने संवाद किया। नमन कौशिक, दीपेश पचौरी और प्रथम चौधरी ने स्टार्टअप की गतिविधियों तथा शतरंज प्रशिक्षण और खेल के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।राज्यपाल ने टीम को शतरंज के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार और खेल को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया।

‘मजदूर सेतु’ के प्रयासों की सराहना

राज्यपाल ने मजदूर सेतु स्टार्टअप के कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने रोजगार के अवसर बढ़ाने के प्रयास को महत्वपूर्ण बताते हुए विशेष रूप से महिलाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया।उन्होंने मजदूर सेतु की पहल को व्यापक स्तर तक पहुंचाने के लिए आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की बात कही।राज्यपाल ने कहा कि स्थानीय कला, कौशल, नवाचार और उद्यमिता को एक मंच पर लाकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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