MLC Election: गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव का परिणाम आने के बाद भी विवाद जारी है। बीजेपी प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव को 307 मतों से हराकर जीत दर्ज की है। वहीं, हार के बाद राजीव यादव ने मतगणना में गड़बड़ी और वोटों की हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। जिसमें उन्होंने निर्वाचन आयोग से चुनाव निरस्त करने और मतपत्रों की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है।
जानकारी के लिए बता दें गोरखपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजीव यादव ने दावा किया कि शुरुआती तीन राउंड की मतगणना में करीब 42 हजार वोटों की गिनती तक वह 376 मतों से आगे थे, लेकिन चौथे राउंड में केवल 1,612 मतों की गिनती के बाद पूरा परिणाम बदल गया और वह 464 मतों से पीछे हो गए।
अंतिम राउंड की मतगणना पर उठाए सवाल
राजीव यादव ने आरोप लगाया कि अंतिम राउंड में उनके पक्ष के मतों में हेराफेरी की गई। जिसमें उनका दावा है कि 1,612 मतों में से 970 वोट बीजेपी प्रत्याशी को मिले, जबकि उन्हें केवल 153 मत प्राप्त हुए। उन्होंने मतपत्रों पर वरीयता क्रम में बदलाव किए जाने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि मतपत्रों पर लिखे अंकों की लिखावट की फॉरेंसिक जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
सीसीटीवी फुटेज नहीं मिलने पर जताई नाराजगी
निर्दलीय प्रत्याशी ने मतगणना केंद्र की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि सीसीटीवी कैमरे (CCTV camera) लगे होने के बावजूद मतगणना की लाइव फुटेज देखने के लिए बाहर कोई स्क्रीन नहीं थी। राजीव यादव के मुताबिक, उन्होंने जिलाधिकारी से संबंधित समय का सीसीटीवी फुटेज मांगा था, लेकिन उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया।
चुनाव निरस्त करने के लिए आयोग को लिखा पत्र
राजीव यादव ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल, भारत निर्वाचन आयोग और उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर शिकायत दर्ज कराई है। जिसमें उन्होंने चुनाव निरस्त करने और मतपत्रों की जांच कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं होने पर वह न्यायालय में रिट याचिका दाखिल करेंगे।
शिक्षकों के मुद्दों पर जारी रहेगा संघर्ष
राजीव यादव ने करीब 15 हजार शिक्षकों का समर्थन मिलने का दावा करते हुए कहा कि चुनाव हारने के बावजूद वह शिक्षकों की समस्याओं को उठाते रहेंगे। उन्होंने पुरानी पेंशन बहाली, वेतनमान और सेवा सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुख बताया। जिसमें उनका कहना है कि जो राजनीतिक दल शिक्षकों और कर्मचारियों की मांगों को पूरा करेगा, वह उसका समर्थन करेंगे। उन्होंने यह भी साफ किया है कि शिक्षक राजनीति किसी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं, बल्कि शिक्षक संगठनों के माध्यम से होनी चाहिए। फिलहाल मतगणना में धांधली को लेकर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब सबकी नजर निर्वाचन आयोग की कार्रवाई और राजीव यादव के अगले कदम पर है।
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