महोबा में गांवों की बदहाल सड़कों को लेकर बच्चों ने प्रशासन का ध्यान खींचा है। कबरई विकासखंड के इलाहीपुरा ग्योड़ी और दिसरापुर बिलवई गांव से बड़ी संख्या में बच्चे, महिलाएं और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर गांवों की खराब सड़कों की समस्या का समाधान कराने और पक्की सड़क बनवाने की मांग की।
कच्चे रास्ते पर चलना बना मजबूरी
इलाहीपुरा ग्योड़ी गांव खन्ना मुख्य मार्ग से करीब 500 मीटर अंदर स्थित है। ग्रामीणों के अनुसार गांव तक पहुंचने के लिए अब तक पक्की सड़क की सुविधा नहीं है और लोग कच्चे रास्ते का इस्तेमाल करते हैं।बारिश के दिनों में यह रास्ता कीचड़ और पानी से भर जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों पर पड़ता है, जिन्हें रोजाना इसी रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बुजुर्गों, बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी इस रास्ते से निकलना मुश्किल हो जाता है।
दिसरापुर बिलवई में भी रास्ते की हालत खराब
दिसरापुर बिलवई गांव में हजरत इब्राहिम शहीद दरगाह से रेलवे पटरी तक जाने वाले मार्ग की स्थिति भी खराब बताई गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, रास्ते पर पक्की सड़क या खड़ंजा नहीं होने के कारण बारिश के बाद यहां कीचड़ और दलदल की स्थिति बन जाती है। बच्चों ने बताया कि रास्ते में फिसलने के कारण कई बार वे गिर चुके हैं। इससे कपड़े, जूते और स्कूल बैग खराब होने के साथ चोट लगने की घटनाएं भी होती हैं। रास्ते की खराब स्थिति के चलते कुछ अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से भी हिचकते हैं, जिसका असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है।
एंबुलेंस पहुंचने में भी परेशानी का दावा
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने आपातकालीन सेवाओं को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि खराब और दलदली रास्तों के कारण 102 और 108 एंबुलेंस समेत अन्य वाहनों को गांव तक पहुंचने में परेशानी होती है। गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को कई बार चारपाई के सहारे मुख्य मार्ग तक ले जाने की स्थिति बनती है। ग्रामीणों ने इसे गांव की गंभीर बुनियादी समस्या बताते हुए तत्काल समाधान की मांग की।
बच्चों ने डीएम से की स्थलीय निरीक्षण की मांग
कलेक्ट्रेट पहुंचे बच्चों और ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से दोनों गांवों के रास्तों का मौके पर निरीक्षण कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के अभाव में बच्चों की शिक्षा से लेकर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी तक प्रभावित हो रही है। अब ग्रामीणों और बच्चों की मांग पर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की नजर है।

