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शुकतीर्थ में घटा गंगा का जलस्तर, श्रद्धालुओं ने उठाई स्वच्छता व जल प्रवाह बढ़ाने की मांग

मुजफ्फरनगर: पौराणिक एवं धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तीर्थनगरी शुकतीर्थ (शुक्रताल) इन दिनों गंगा के घटते जलस्तर और अव्यवस्थाओं के कारण चर्चा में है। गर्मी के मौसम में गंगा का जलस्तर कम होने से नदी का पानी घाटों से काफी दूर चला गया है, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान और धार्मिक अनुष्ठान करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही घाटों पर फैली गंदगी, जलकुंभी, कीचड़ और दुर्गंध ने श्रद्धालुओं की परेशानी और बढ़ा दी है।

शुकतीर्थ में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक पर्यटन के कारण यहां स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलता है। लेकिन वर्तमान में गंगा का जलस्तर घटने और व्यवस्थाओं की कमी के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में कमी देखी जा रही है, जिसका असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

दिल्ली से आई श्रद्धालु रितिका राघव ने बताया कि वह बड़ी श्रद्धा के साथ शुकतीर्थ पहुंचीं, लेकिन यहां की व्यवस्थाओं से निराश हुईं। उन्होंने घाटों पर फैली गंदगी, दुर्गंध और महिलाओं के लिए पर्याप्त सुविधाओं की कमी की ओर ध्यान दिलाया। अन्य श्रद्धालुओं ने भी कहा कि गंगा में पानी कम होने के कारण स्नान में परेशानी हो रही है और घाटों की सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है।

उत्तराखंड से आई श्रद्धालु जगमोहनी ने कहा कि शुकतीर्थ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल पर बेहतर सुविधाएं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि घाटों पर जलकुंभी, कीचड़ और गंदगी के कारण श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं श्रद्धालु सोनिया अरोड़ा ने कहा कि घाटों पर दलदल जैसी स्थिति होने से वह गंगा स्नान भी नहीं कर सकीं।

स्थानीय नाविकों और व्यापारियों ने भी चिंता जताई है। नाविक अनोकित के अनुसार गंगा में जलस्तर कम होने से मोटरबोट संचालन प्रभावित हो रहा है और श्रद्धालुओं की संख्या घटने से उनकी आजीविका पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष गर्मियों में यही समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाता।

संत समाज और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गंगा में पर्याप्त जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाए और घाटों की नियमित सफाई कराई जाए। संतों ने कहा कि गंगा केवल नदी नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

श्रद्धालुओं और संत समाज का मानना है कि शुकतीर्थ की धार्मिक गरिमा बनाए रखने के लिए गंगा की अविरल धारा, स्वच्छता और बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना आवश्यक है।

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