कुशीनगर: बाढ़ के बीच कुशीनगर में एपी तटबंध पर कटान बढ़ने से आसपास के ग्रामीण इलाकों में चिंता बढ़ गई है। बड़ी गंडक नदी के बढ़े जलस्तर के बीच पानी की तेज धार से प्रमुख संपर्क मार्ग का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। इसके चलते कई गांवों का आवागमन प्रभावित हुआ है।
तेज बहाव से तमकुहीराज-अहिरौलीदान मार्ग क्षतिग्रस्त
बुधवार रात नदी के तेज बहाव के कारण तमकुहीराज-अहिरौलीदान मुख्य मार्ग को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा मठियाश्रीराम गांव के पास कोदो बाबा स्थान के समीप सिसवा-अहिरौलीदान मार्ग का करीब 20 मीटर हिस्सा कटकर बह गया। सड़क टूटने के कारण सिसवा, अहिरौलीदान, खैरटिया समेत आसपास के गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। दोनों ओर आवागमन बाधित होने से ग्रामीणों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।
राहत सामग्री पहुंचाने में बढ़ी चुनौती
मार्ग क्षतिग्रस्त होने के बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, दवाएं और अन्य जरूरी सामान पहुंचाना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। सड़क संपर्क टूटने से ग्रामीणों को बाजार, अस्पताल, स्कूल और तहसील मुख्यालय तक पहुंचने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पहले से बाढ़ की स्थिति से जूझ रहे ग्रामीणों की मुश्किलें संपर्क मार्ग टूटने के बाद और बढ़ गई हैं।
तटबंध का काम अधूरा होने पर उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर तटबंध पर चल रहे कार्य को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि तटबंध से संबंधित करीब 50 प्रतिशत काम अभी पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में कटान बढ़ने के बीच सुरक्षा व्यवस्था और बचाव कार्यों को लेकर चिंता जताई जा रही है।
बोल्डर और भारी मशीनरी की उपलब्धता पर सवाल
कटान को नियंत्रित करने के लिए बड़े बोल्डर, भारी मशीनरी और पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआती स्तर पर कटान को रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम किए जाने जरूरी थे। दिन में रिसाव और कटान की स्थिति सामने आने के बाद रात के समय आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
अधिकारियों की भूमिका पर कार्रवाई की मांग
कटान और सड़क क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थानीय लोगों में बाढ़ खंड के अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी है। लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की मांग उठाई है। फिलहाल प्रशासन के सामने क्षतिग्रस्त मार्ग पर आवागमन बहाल करने, तटबंध की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बाढ़ प्रभावित गांवों तक राहत पहुंचाने की बड़ी चुनौती है।

