Site icon UP की बात

नोएडा में यमुना पुश्ता पर एलिवेटेड रोड की तैयारी, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और ट्रैफिक प्रबंधन को मिलेगा बड़ा लाभ

नोएडा एक्सप्रेसवे पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव और इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए यमुना पुश्ता पर एलिवेटेड रोड बनाने की योजना पर काम तेज कर दिया गया है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का उद्देश्य दिल्ली-नोएडा क्षेत्र से एयरपोर्ट तक सीधी और तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। सड़क निर्माण का जिम्मा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) या यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) में से किसी एक एजेंसी को सौंपा जा सकता है।

पीपीपी मॉडल पर निर्माण का प्रस्ताव, टोल के जरिए होगी लागत की भरपाई

एलिवेटेड रोड को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित करने की संभावना है, जिसमें टोल वसूली के माध्यम से निर्माण लागत की रिकवरी की जाएगी। चूंकि सड़क का निर्माण यमुना पुश्ता और उसके आसपास की जमीन पर प्रस्तावित है, इसलिए सिंचाई विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होगा। इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए शासन स्तर पर प्रयास तेज किए गए हैं।

लखनऊ में हाईलेवल बैठक…फंडिंग, डिजाइन और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा

इस परियोजना को लेकर लखनऊ में एक हाईलेवल बैठक आयोजित की गई, जिसमें यमुना पुश्ता रोड पर प्रस्तावित एलिवेटेड प्रोजेक्ट की जियोग्राफिक मैपिंग प्रस्तुत की गई। बैठक में फंडिंग पैटर्न, निर्माण एजेंसी, डिजाइन और तकनीकी चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। यह चर्चा आईडीसी दीपक कुमार के साथ की गई, जिसके बाद माना जा रहा है कि जल्द ही इस प्रोजेक्ट पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

सिंचाई विभाग की एनओसी रही है चुनौती, नई तकनीक के जरिए समाधान की कोशिश

इससे पहले नोएडा प्राधिकरण कई बार सिंचाई विभाग से एनओसी लेने का प्रयास कर चुका है। करीब तीन महीने पहले विभाग ने पत्र जारी कर स्पष्ट किया था कि तटबंध के पास निर्माण से ड्रेनेज चैनल और एम्बैंकमेंट प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए अनुमति देना संभव नहीं है। अब नई और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है, ताकि एलिवेटेड स्वरूप में सड़क बनाकर पर्यावरणीय और तकनीकी जोखिमों को कम किया जा सके।

बोर्ड बैठक में यूपीडा को मिली थी सैद्धांतिक मंजूरी

यमुना पुश्ता सेक्टर-94 से सेक्टर-150 तक करीब 23 किलोमीटर लंबा है और आगे यमुना एक्सप्रेसवे तक यह दूरी लगभग 30 किलोमीटर हो जाती है। पूरे इस कॉरिडोर पर एलिवेटेड रोड बनाने की योजना है, जिसकी लागत हजारों करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इतना बड़ा बजट अकेले वहन करना नोएडा प्राधिकरण के लिए संभव नहीं है, इसी वजह से बोर्ड बैठक में निर्माण के लिए यूपीडा को चुने जाने और खर्च तीनों प्राधिकरणों द्वारा साझा करने का प्रस्ताव पास किया गया था।

एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे दोनों को मिलेगा फायदा, ट्रैफिक दबाव में होगी कमी

लखनऊ में हुई बैठक के सकारात्मक नतीजे जल्द सामने आने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि सिंचाई विभाग एनओसी जारी कर सकता है और निर्माण कार्य एनएचएआई या यूपीडा को सौंपा जा सकता है। एलिवेटेड रोड के बन जाने से दिल्ली और नोएडा क्षेत्र को इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सीधी और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी, वहीं नोएडा एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक का दबाव भी काफी हद तक कम हो जाएगा।

Exit mobile version