ग्रेटर नोएडा से आम्रपाली ग्रुप को लेकर एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है। घर का सपना दिखाकर हजारों बायर्स से करोड़ों रुपये जुटाने और फिर उस धन को विदेश भेजने के आरोपों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सख्त कदम उठाया है। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद आम्रपाली ग्रुप से जुड़ी 99.26 करोड़ रुपये की संपत्ति को कुर्क कर लिया गया है। इस कार्रवाई से रियल एस्टेट सेक्टर और बायर्स के बीच हलचल तेज हो गई है।
विदेश भेजा गया 100 करोड़ से ज्यादा का धन
ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि आम्रपाली समूह से जुड़े लोगों ने बायर्स से जुटाए गए पैसों में से 100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम विदेश भेज दी। यह पैसा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के बजाय संदिग्ध लेन-देन के जरिए बाहर भेजा गया, जिससे हजारों खरीदार आज भी अपने घर का इंतजार कर रहे हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता सबूत मिलने के बाद ईडी ने यह कार्रवाई की।
मौर्या उद्योग लिमिटेड की संपत्तियां कुर्क
ईडी ने आम्रपाली समूह से जुड़ी कंपनी मेसर्स मौर्या उद्योग लिमिटेड के ग्रेटर नोएडा स्थित दफ्तर और फैक्ट्री की जमीन को कुर्क किया है। इसके साथ ही कंपनी के एक भवन को भी जब्त किया गया है। यह कंपनी सुरेका समूह से जुड़ी बताई जा रही है, जिसके प्रमोटर नवनीत सुरेका और अखिल सुरेका हैं। वर्ष 2016 में इन संपत्तियों का बाजार मूल्य 99.26 करोड़ रुपये आंका गया था, जो वर्तमान में बढ़कर 200 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
निर्माण सामग्री की खरीद के नाम पर रकम डायवर्ट
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि आम्रपाली समूह के निदेशक अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिया, अजय कुमार समेत अन्य आरोपियों ने मौर्या उद्योग लिमिटेड और मेसर्स जोतिंद्र स्टील एंड ट्यूब्स लिमिटेड के निदेशकों के साथ मिलकर टीएमटी बार और अन्य निर्माण सामग्री की खरीद के बहाने करोड़ों रुपये डायवर्ट किए। यह धन आवासीय परियोजनाओं में लगाने के बजाय इधर-उधर किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बायर्स को राहत की उम्मीद
इस पूरे मामले के बीच घर खरीदारों के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों तथा उत्तर प्रदेश सरकार को आम्रपाली परियोजनाओं के लिए कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र (CC) और कब्जा प्रमाणपत्र (OC) जारी करने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों, कोर्ट रिसीवर और एनबीसीसी के अधिकारियों को संयुक्त बैठक कर समाधान निकालने को कहा है।
क्लियरेंस की कमी से अटकी है कब्जे की प्रक्रिया
आम्रपाली परियोजनाओं के लिए नियुक्त कोर्ट रिसीवर आर. वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि पिछली मंजूरियों और अनापत्ति प्रमाणपत्रों की अनुपलब्धता के कारण ओसी और सीसी जारी करने में परेशानी हो रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को निर्देश दिया है कि वह आम्रपाली ग्रुप को पहले जारी सभी क्लियरेंस और सर्टिफिकेट की प्रतियां कोर्ट में पेश करे, ताकि निर्माण पूरा होने के बाद बायर्स को जल्द से जल्द उनके घरों का कब्जा मिल सके।

