उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (5 जनवरी 2026) को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा कि भगवान राम के सम्मान और रामभक्तों की भावनाओं के लिए कल्याण सिंह ने सत्ता तक कुर्बान करने में जरा भी संकोच नहीं किया।
1991 का दौर: अराजकता और कुशासन
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री के रूप में जब कल्याण सिंह ने 1991 में प्रदेश की कमान संभाली, तब राज्य में अराजकता, गुंडागर्दी और कुशासन का माहौल था। सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों, गरीबों और युवाओं तक नहीं पहुंच पा रहा था। उन्होंने कहा, “एक तरफ अराजकता और कुशासन था, दूसरी तरफ हिंदू समाज 500 साल की गुलामी से मुक्ति के लिए तरस रहा था।”
राम जन्मभूमि आंदोलन के चरम पर लिया ऐतिहासिक निर्णय
सीएम योगी ने कहा कि जब राम जन्मभूमि आंदोलन अपने चरम पर था, तब कल्याण सिंह को अस्थिर करने की साजिशें रची गईं। इसके बावजूद उन्होंने रामभक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए अपने आराध्य भगवान राम के लिए सत्ता त्याग दी। मुख्यमंत्री के शब्दों में, “पूर्व सीएम ने गुलामी के ढांचे को हटाने की सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली।”
सुशासन, विकास और राष्ट्रवादी मिशन की पहचान
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रद्धेय कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ का मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल सुशासन, विकास और राष्ट्रवादी मिशन को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन विधायक, मुख्यमंत्री, सांसद और राज्यपाल के रूप में उनकी सेवाएं सदैव स्मरणीय रहेंगी।
CM योगी का भावुक संदेश
जयंती के अवसर पर सीएम योगी ने एक वीडियो संदेश साझा करते हुए लिखा- “असंख्य रामभक्तों के हृदय में विश्वास का दीप प्रज्वलित करने वाले श्री राम मंदिर आंदोलन के अडिग सेनानी, राजस्थान के पूर्व राज्यपाल, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, ‘पद्म विभूषण’ श्रद्धेय कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। निष्ठा, त्याग और समर्पण की प्रतिमूर्ति बाबूजी ने अपनी जन-कल्याणकारी नीतियों और दृढ़ प्रशासनिक संकल्प से उत्तर प्रदेश के विकास को नई गति दी। उनका जीवन समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है।”
कल्याण सिंह की जयंती पर मुख्यमंत्री योगी के ये शब्द न केवल राम मंदिर आंदोलन के निर्णायक दौर की याद दिलाते हैं, बल्कि सत्ता से ऊपर सिद्धांत और आस्था को रखने वाले नेतृत्व की मिसाल भी प्रस्तुत करते हैं।

