लखनऊ: उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री अधिकारियों के साथ राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा करने के साथ ही प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दे रहे हैं।
कई जिलों में बाढ़ का असर
भारी बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर के चलते प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ और कटान की स्थिति बनी है। पूर्वांचल और तराई के कई क्षेत्रों में लोगों को जलभराव, सड़क संपर्क बाधित होने और फसलों के नुकसान जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेते हुए अधिकारियों को राहत शिविरों में पर्याप्त व्यवस्था करने, प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरत के अनुसार बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
कुशीनगर में तटबंध टूटने के बाद CM ने लिया जायजा
कुशीनगर में नारायणी नदी के बढ़े जलस्तर के बीच तटबंध को नुकसान पहुंचने की स्थिति सामने आई। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और मौके पर राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और तटबंध को मजबूत करने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
सरकार की ओर से लगातार दिए जा रहे निर्देश
बाढ़ की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री पहले भी सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को संवेदनशील तटबंधों और बैराजों की निगरानी के निर्देश देते रहे हैं। सरकार की ओर से बाढ़ नियंत्रण, तटबंधों की मरम्मत और जलस्तर की निगरानी के लिए संसाधन और बजट उपलब्ध कराने की बात कही जाती रही है। इसके बावजूद कई स्थानों पर तटबंधों को नुकसान पहुंचने और जलभराव की स्थिति सामने आने के बाद अब जमीनी स्तर पर काम की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पैसा और निर्देश के बाद भी क्यों बिगड़ती है स्थिति?
सरकार की ओर से बाढ़ नियंत्रण के लिए धन और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद यदि किसी क्षेत्र में तटबंध कमजोर पड़ते हैं या समय रहते जरूरी मरम्मत नहीं होती, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। सवाल यह है कि जिन संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से बाढ़ का खतरा रहता है, वहां मानसून से पहले तटबंधों की मरम्मत और निगरानी कितनी प्रभावी तरीके से की गई। यदि समय रहते जरूरी काम पूरे किए जाते तो क्या कुछ इलाकों में नुकसान को कम किया जा सकता था?
सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली की हो जांच
बाढ़ की हर घटना को केवल प्राकृतिक आपदा मानकर प्रशासनिक जिम्मेदारी से बचना उचित नहीं होगा। जहां तटबंधों की खराब स्थिति, मरम्मत में देरी या लापरवाही सामने आती है, वहां संबंधित अधिकारियों और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। भ्रष्टाचार के आरोपों को भी जांच के आधार पर ही प्रमाणित किया जा सकता है। इसलिए जहां भी सरकारी धन के इस्तेमाल या काम की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें हैं, वहां निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
PM मोदी और CM योगी की निगरानी के बीच बढ़ी जवाबदेही
बाढ़ की स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य सरकार लगातार निगरानी कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती इन निर्देशों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने की है। सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे बजट और संसाधनों का सही इस्तेमाल हो तथा तटबंधों और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्य समय पर पूरे हों, यह सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।
बाढ़ से बचाव के लिए जवाबदेही जरूरी
बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को कम करने पर भी ध्यान देना होगा। तटबंधों की नियमित जांच, समय पर मरम्मत और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार के निर्देशों के बाद सिंचाई विभाग और संबंधित अधिकारी जमीनी स्तर पर कितनी गंभीरता से काम करते हैं और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्यों में लापरवाही मिलने पर क्या कार्रवाई की जाती है।

