मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में संभावित बाढ़ और अतिवृष्टि से पहले आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर लखनऊ में विस्तृत समीक्षा बैठक की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समय रहते की गई मजबूत तैयारी ही बाढ़ प्रबंधन की सबसे बड़ी कुंजी है। सभी संबंधित विभाग पूरी सतर्कता और आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में जान-माल की क्षति को न्यूनतम किया जा सके।
तटबंधों, ड्रेनों और संवेदनशील स्थलों पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी तटबंधों, ड्रेनों और बाढ़-प्रभावित संवेदनशील स्थानों की समयबद्ध मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी और सभी कार्य तय समयसीमा में पूरे किए जाएं।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग और आधुनिक तकनीक का उपयोग
सीएम योगी ने सभी तटबंधों और बैराजों पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने ड्रोन-मैपिंग, वाटर लेवल सेंसर और स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से बाढ़ की स्थिति पर समय रहते नियंत्रण पाया जा सकता है।
ड्रेजिंग और नदी चैनलाइजेशन को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां नदियों की मुख्य धारा में सिल्ट की अधिकता के कारण नदी उथली हो गई है, वहां ड्रेजिंग को प्राथमिकता दी जाए और नदी को वैज्ञानिक तरीके से चैनलाइज किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ड्रेजिंग से समाधान संभव न हो, तभी तटबंध निर्माण या कटान-निरोधक अन्य उपाय अपनाए जाएं।
सतर्कता और समन्वय से सुरक्षित बाढ़ प्रबंधन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सतर्कता, आपसी समन्वय और तय समयसीमा में कार्यों की पूर्णता ही सुरक्षित और प्रभावी बाढ़ प्रबंधन का आधार है। उन्होंने भरोसा जताया कि समय रहते की गई ये तैयारियां प्रदेश को बाढ़ और अतिवृष्टि जैसी आपदाओं से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

