कुशीनगर। शिक्षक दिवस के अवसर पर सेवरही स्थित किसान डिग्री कॉलेज में रविवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आध्यात्म, शिक्षा और राजनीति से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया। संगोष्ठी का मुख्य विषय शिक्षक और गुरु की भूमिका तथा जीवन में उनके महत्व से जुड़ा रहा। कार्यक्रम में मथुरा आनंदम धाम पीठ के पीठाधीश्वर रितेश्वर महाराज मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उनके अलावा पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी समेत कई अन्य अतिथि मौजूद रहे।
रितेश्वर महाराज ने बताया गुरु के मार्गदर्शन का महत्व
संगोष्ठी में रितेश्वर महाराज ने गुरु-शिष्य परंपरा और जीवन में गुरु की भूमिका पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति के जीवन को सही दिशा देने में अहम भूमिका निभाता है।उनके संबोधन को सुनने के लिए कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। शिक्षा के साथ संस्कार और जीवन मूल्यों को अपनाने पर भी वक्ताओं ने जोर दिया।
बृजभूषण शरण सिंह के बयान पर गूंज उठा सभागार
कार्यक्रम के दौरान पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह अपने बेबाक अंदाज में नजर आए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “दबदबा था, दबदबा है और दबदबा बना रहेगा।” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। बृजभूषण सिंह ने अपने संबोधन में गुरु और शिष्य के रिश्ते का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अयोध्या के कई संतों ने उन्हें अपना शिष्य बनाने के लिए काफी समर्पण दिखाया, लेकिन उन्होंने किसी को गुरु के रूप में स्वीकार नहीं किया।
70 साल की उम्र के बाद रितेश्वर महाराज को बनाया गुरु
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि 70 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद उन्होंने रितेश्वर महाराज को अपना गुरु स्वीकार किया है। उन्होंने गुरु के महत्व को बताते हुए कहा कि गुरु का स्थान व्यक्ति के जीवन में बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक जहां व्यक्ति को ज्ञान और शिक्षा प्रदान करता है, वहीं गुरु जीवन में संस्कार, दिशा और सही मार्ग चुनने की समझ विकसित करता है। गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति के व्यक्तित्व और जीवन यात्रा पर गहरा प्रभाव डालता है।
भाजपा नेता विजय राय ने कराया कार्यक्रम का आयोजन
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भाजपा नेता विजय राय की ओर से किया गया था। कार्यक्रम में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी सहित कई गणमान्य नागरिक, शिक्षक और अन्य लोग मौजूद रहे। संगोष्ठी के दौरान शिक्षा, संस्कार और भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने वक्ताओं के संबोधन को ध्यानपूर्वक सुना।

